Bab el-Mandeb: सऊदी अरब के साथ जारी संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच हूती विद्रोहियों ने एक अहम रणनीतिक बढ़त हासिल करने का दावा किया है। हूती लड़ाकों के मुताबिक उन्होंने Bab el-Mandeb Strait में स्थित मयून द्वीप पर नियंत्रण कर लिया है। यह द्वीप समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। खास बात यह है कि मयून द्वीप पर हूती कब्जे की पुष्टि केवल विद्रोही संगठन की ओर से नहीं हुई है, बल्कि यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के एक अधिकारी ने भी इसकी पुष्टि की है।
Bab el-Mandeb: यमन की सरकारी सेना ने छोड़ा था द्वीप
यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के मुताबिक, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने मयून द्वीप पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया है। बताया गया है कि यमन की सरकारी सेना बीते गुरुवार को इस द्वीप से पीछे हट गई थी। इसके बाद हूती लड़ाकों ने यहां अपनी मौजूदगी कायम कर ली।
एक हूती अधिकारी ने भी इस घटनाक्रम की पुष्टि की है। मयून द्वीप को पेरिम द्वीप के नाम से भी जाना जाता है और यह यमन के पश्चिमी तट से करीब साढ़े तीन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। दोनों अधिकारियों ने पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर जानकारी दी, क्योंकि उन्हें मीडिया से बातचीत करने की आधिकारिक अनुमति नहीं थी।
Bab el-Mandeb Strait क्यों है इतना महत्वपूर्ण
मयून द्वीप की रणनीतिक अहमियत इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि यह Bab el-Mandeb Strait के बेहद करीब स्थित है। यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अरब सागर और आगे हिंद महासागर की दिशा से जोड़ने वाले महत्वपूर्ण रास्तों में शामिल है।
मौजूदा परिस्थितियों में इसकी अहमियत और बढ़ गई है, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष के कारण होर्मुज स्ट्रेट से जुड़े समुद्री व्यापार पर गंभीर दबाव बना हुआ है। ऐसे समय में Bab el-Mandeb को वैकल्पिक समुद्री रास्ते के तौर पर देखा जा रहा था। लेकिन अब मयून द्वीप पर हूती विद्रोहियों की मौजूदगी ने इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।
Bab el-Mandeb: मयून द्वीप पर कब्जे से जहाजों के लिए बढ़ा खतरा
मयून द्वीप Bab el-Mandeb Strait के समुद्री रास्ते के बेहद करीब है। ऐसे में इस द्वीप पर नियंत्रण मिलने के बाद हूती विद्रोहियों की समुद्री गतिविधियों और निगरानी क्षमता बढ़ सकती है। खासकर उन व्यापारिक जहाजों को लेकर चिंता बढ़ रही है, जिन्हें इस संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरना पड़ता है।
हूती विद्रोहियों का कहना है कि उनकी सैन्य गतिविधियों का एक उद्देश्य सऊदी अरब से जुड़े जहाजों को निशाना बनाना भी है। ऐसे में मयून द्वीप पर उनकी मौजूदगी को लाल सागर और Bab el-Mandeb क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा के लिए गंभीर घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा है।
Bab el-Mandeb: कहां स्थित है मयून द्वीप?
मयून द्वीप यमन के पश्चिमी तट से करीब 3.5 किलोमीटर दूर समुद्र में स्थित है। यह Bab el-Mandeb Strait के बीच रणनीतिक स्थिति में मौजूद है। इसकी भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि यहां से गुजरने वाले समुद्री यातायात पर नजर रखना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है।
यही वजह है कि इस छोटे से द्वीप का सैन्य और रणनीतिक महत्व उसकी भौगोलिक सीमा से कहीं ज्यादा है। अगर हूती विद्रोही यहां अपनी स्थिति मजबूत करने में सफल रहते हैं, तो इससे आसपास के समुद्री मार्गों पर उनकी पकड़ बढ़ सकती है।
Bab el-Mandeb Strait से कितना व्यापार गुजरता है?
Bab el-Mandeb Strait दुनिया के प्रमुख समुद्री चोकपॉइंट्स में गिना जाता है। यह अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी हिस्से के पास स्थित है और लाल सागर को आगे के अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों से जोड़ता है।
इस समुद्री रास्ते से दुनिया के कुल व्यापार का करीब 12 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। इसके अलावा वैश्विक कंटेनर यातायात का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा भी इस संकरे समुद्री मार्ग से होकर गुजरने का अनुमान है। यही कारण है कि यहां किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या नाकेबंदी का असर केवल यमन या आसपास के देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट के बाद Bab el-Mandeb पर दुनिया की नजर
मौजूदा पश्चिम एशिया संकट ने Bab el-Mandeb की भूमिका को और महत्वपूर्ण बना दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए दूसरे समुद्री रास्तों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जा रहा था। Bab el-Mandeb को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग माना जा रहा था।
लेकिन अब इस इलाके में हूती विद्रोहियों की पकड़ मजबूत होने की खबर ने समुद्री व्यापार की चिंता बढ़ा दी है। अगर इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों को लगातार खतरा रहता है, तो कंपनियों को लंबा समुद्री रास्ता अपनाने या अपनी शिपिंग रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ सकता है।
जुलाई में Bab el-Mandeb से करीब 100 किलोमीटर दूर थे हूती
इस घटनाक्रम को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि कुछ समय पहले तक हूती विद्रोही Bab el-Mandeb Strait से करीब 100 किलोमीटर दूर यमन के तटीय हिस्सों तक सीमित बताए जा रहे थे। उस समय मयून द्वीप और स्ट्रेट के आसपास उनका सीधा नियंत्रण नहीं था।
अब मयून द्वीप पर कब्जे के दावे के बाद स्थिति बदल गई है। रणनीतिक द्वीप पर मौजूदगी का मतलब है कि हूती विद्रोही Bab el-Mandeb से गुजरने वाले जहाजों की गतिविधियों पर पहले की तुलना में अधिक करीब से नजर रखने की स्थिति में आ सकते हैं।
Bab el-Mandeb: समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर क्या असर होगा?
Bab el-Mandeb की सुरक्षा में किसी भी तरह की गिरावट का असर वैश्विक समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। इस रास्ते से कंटेनर जहाजों के अलावा ऊर्जा और अन्य जरूरी सामान ले जाने वाले पोत भी गुजरते हैं। ऐसे में यदि यहां हमलों या अवरोध का खतरा बढ़ता है तो जहाजों को वैकल्पिक लंबे रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव, होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बनी अनिश्चितता और अब मयून द्वीप पर हूती विद्रोहियों की मौजूदगी ने समुद्री व्यापार के लिए स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हूती विद्रोही द्वीप पर अपनी स्थिति कितनी मजबूत करते हैं और Bab el-Mandeb से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर इसका कितना असर पड़ता है।


