Report by: Ajay Nigam
Indore: इंदौर में ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर और गंभीर व्यवहार संबंधी समस्याओं से जूझ रहे 7 वर्षीय बच्चे में करीब एक वर्ष के दौरान संवाद और सामाजिक व्यवहार में बदलाव सामने आने का मामला चर्चा में है। परिवार के अनुसार, अगस्त 2025 में जब बच्चे को इंदौर के गीता भवन रोड स्थित एडवांस्ड होम्यो हेल्थ सेंटर लाया गया था, तब वह सार्थक रूप से बोल नहीं पाता था। उसका आई कॉन्टैक्ट भी लगभग नहीं था और वह काफी चंचल एवं बेचैन रहता था।
परिवार के लिए स्थिति इतनी चुनौतीपूर्ण थी कि बच्चे को घर से बाहर निकलने या खुद को नुकसान पहुंचाने से रोकने के लिए कई बार उसे रस्सी से बांधकर रखना पड़ता था। माता-पिता लगातार उसकी गतिविधियों पर नजर रखते थे और उसके व्यवहार को नियंत्रित करने में उन्हें काफी परेशानी होती थी।
सीनियर होम्योपैथी फिजिशियन डॉ. ए.के. द्विवेदी के अनुसार, बच्चे का केस लेते समय उसके विकासात्मक इतिहास, व्यवहार, संवाद क्षमता, सामाजिक प्रतिक्रिया, पारिवारिक परिस्थितियों और व्यक्तिगत विशेषताओं को विस्तार से समझने की कोशिश की गई। बच्चे की मां ने गर्भावस्था के दौरान अत्यधिक मानसिक तनाव और अनिश्चितता का भी जिक्र किया था। डॉक्टर के अनुसार, इसे केस हिस्ट्री के एक हिस्से के तौर पर देखा गया, बच्चे की स्थिति का एकमात्र कारण नहीं माना गया।
Indore: 4-5 महीने में आई कॉन्टैक्ट, 7-8 महीने बाद बोला ‘मां’
डॉक्टर के मुताबिक उपचार के साथ बच्चे के माता-पिता की काउंसलिंग को भी प्रक्रिया का अहम हिस्सा बनाया गया। परिवार को समझाया गया कि बच्चे को बांधकर रखने के बजाय उसके लिए सुरक्षित और सकारात्मक माहौल तैयार करना जरूरी है। गंभीर व्यवहार संबंधी परेशानियों को देखते हुए परिवार को एलोपैथिक मनोचिकित्सक से परामर्श लेने की सलाह भी दी गई।
परिवार के अनुसार, उपचार शुरू होने के करीब 4-5 महीने बाद बच्चे में आई कॉन्टैक्ट में सुधार दिखाई देने लगा। माता-पिता के लिए यह महत्वपूर्ण बदलाव था, क्योंकि शुरुआत में बच्चा लोगों की ओर ठीक से देखता भी नहीं था।
इसके बाद लगभग 7-8 महीने के दौरान बच्चे ने पहली बार अपनी मां को ‘मां’ कहकर पुकारा। परिवार के लिए यह भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षण था। मां के मुताबिक बच्चा अब उनके करीब आने लगा था और उनके साथ चिपककर सोने लगा।
सितंबर 2026 में सतना से बच्चे की मां उसे फॉलोअप के लिए इंदौर लेकर पहुंचीं। परिवार के अनुसार, अब बच्चा पूरे वाक्य बोल रहा है और उसकी अत्यधिक चंचलता तथा व्यवहार संबंधी परेशानियों में भी कमी आई है। उसके शिक्षक और केयरटेकर ने भी बच्चे में आए बदलाव को सकारात्मक बताया।
फॉलोअप के दौरान डॉक्टर ने खुद भी बच्चे के व्यवहार में अंतर देखा। उनके मुताबिक बच्चा क्लिनिक के केबिन में आया, डॉक्टर को नमस्कार किया और सामने रखी कुर्सी पर जाकर बैठ गया। डॉक्टर ने इसे शुरुआती मुलाकात की तुलना में बच्चे के सामाजिक व्यवहार में दिखाई देने वाला महत्वपूर्ण बदलाव बताया।
Indore: डॉक्टर बोले- मामला अभी ऑब्जर्वेशन में, एक केस से नहीं निकाला जा सकता अंतिम निष्कर्ष
डॉ. ए.के. द्विवेदी ने अपने 27 वर्षों के चिकित्सकीय अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने कई जटिल मामले देखे हैं, लेकिन इस बच्चे में धीरे-धीरे आए बदलाव ने उन्हें विशेष रूप से प्रभावित किया। उनके मुताबिक इस मामले में सिर्फ बच्चे का बोलना शुरू करना ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि आई कॉन्टैक्ट, सामाजिक प्रतिक्रिया, मां के साथ भावनात्मक जुड़ाव और व्यवहार में आए बदलाव भी उल्लेखनीय हैं।
हालांकि, डॉक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे का उपचार अभी जारी है और पूरे मामले को “Ongoing Homoeopathic Treatment – Observational Case” के तौर पर दस्तावेजित किया जा रहा है। एक अकेले केस के आधार पर किसी उपचार को ऑटिज्म में प्रभावी साबित करने या बच्चे के विकासात्मक बदलाव का कारण निश्चित रूप से बताने का वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
आगे के फॉलोअप में बच्चे की वर्बल कम्युनिकेशन, वाक्य निर्माण, आई कॉन्टैक्ट, सामाजिक व्यवहार, गतिविधि स्तर, व्यवहार नियंत्रण, स्कूल प्रदर्शन और केयरटेकर के साथ सहभागिता जैसे पहलुओं पर नजर रखी जाएगी।
डॉ. द्विवेदी का कहना है कि ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों के साथ परिवार और समाज का व्यवहार बेहद महत्वपूर्ण है। बच्चों को केवल उनके व्यवहार के आधार पर नियंत्रित करने के बजाय उनकी जरूरतों को समझना, सुरक्षित वातावरण देना, धैर्य रखना और जरूरत के अनुसार चिकित्सकीय, स्पीच तथा विकासात्मक सहायता उपलब्ध कराना जरूरी है।
उनके अनुसार, होम्योपैथिक पद्धति में ऐसे जटिल मामलों में विस्तृत केस टेकिंग, व्यक्तिगत लक्षणों का अध्ययन, दवा का चयन, potency और dose का निर्धारण तथा नियमित फॉलोअप पर जोर दिया जाता है। इस मामले में भी उपचार के साथ परिवार को व्यवहार संबंधी मार्गदर्शन दिया गया।
डॉ. ए.के. द्विवेदी एडवांस्ड होम्यो हेल्थ सेंटर एवं होम्योपैथिक मेडिकल रिसर्च प्रा. लि., इंदौर से जुड़े हैं। वे केंद्रीय होम्योपैथिक अनुसंधान परिषद (CCRH), आयुष मंत्रालय, भारत सरकार की सेंट्रल एथिकल कमेटी के सदस्य तथा नॉर्थ ईस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड होम्योपैथी (NEIAH), शिलॉन्ग की साइंटिफिक एडवाइजरी कमेटी के सदस्य भी हैं।
परिवार के लिए बच्चे में आया यह बदलाव चिकित्सकीय दावों से कहीं अधिक भावनात्मक महत्व रखता है। जहां शुरुआत में उसके व्यवहार और भविष्य को लेकर माता-पिता बेहद चिंतित थे, वहीं अब संवाद और सामाजिक व्यवहार में आए बदलाव ने उनके भीतर नई उम्मीद पैदा की है।


