Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को वेनेजुएला के साथ एक बड़े तेल समझौते की घोषणा की। ट्रंप ने इसे दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील बताया है। उनके मुताबिक इस समझौते से अमेरिका की कच्चे तेल तक पहुंच बढ़ेगी, ऊर्जा आपूर्ति मजबूत होगी और आने वाले समय में पेट्रोल-गैस की कीमतों को कम करने में मदद मिल सकती है।
ट्रंप का कहना है कि समझौते के जरिए अमेरिकी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार तक अमेरिकी कंपनियों की पहुंच बढ़ने से अमेरिका के पास उपलब्ध तेल संसाधनों में बड़ा इजाफा हो सकता है।
Trump: 65 अरब बैरल से ज्यादा तेल भंडार का जिक्र
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि अमेरिका ने वेनेजुएला के 65 अरब बैरल से अधिक प्रमाणित तेल भंडार पर ज्यादातर नियंत्रण हासिल कर लिया है। उनके अनुसार यह प्रक्रिया अमेरिकी सरकार, निजी कंपनियों और वेनेजुएला की अंतरिम सरकार के सहयोग से आगे बढ़ाई गई है।
ट्रंप ने यह भी कहा कि इस व्यवस्था में अमेरिकी करदाताओं का पैसा इस्तेमाल नहीं किया गया। उन्होंने समझौते को अमेरिका की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण बताया और उम्मीद जताई कि इससे घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों पर दबाव कम हो सकता है।
Trump: ट्रंप ने क्यों बताया इसे ऐतिहासिक समझौता
अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस समझौते को असाधारण बताते हुए दावा किया कि यह दुनिया के इतिहास की सबसे बड़ी तेल डील है। यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब अमेरिका में ऊर्जा कीमतों और ईंधन की लागत को लेकर सरकार पर दबाव बना हुआ है।
ट्रंप प्रशासन लंबे समय से घरेलू ऊर्जा आपूर्ति बढ़ाने और तेल की कीमतों को नियंत्रित करने पर जोर देता रहा है। ऐसे में वेनेजुएला के विशाल तेल संसाधनों तक अमेरिकी कंपनियों की पहुंच को रणनीतिक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
Trump: वेनेजुएला की राजनीति से भी जुड़ा है मामला
वेनेजुएला के तेल को लेकर अमेरिका की नीति वहां के राजनीतिक घटनाक्रम से भी जुड़ी हुई है। ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो पर गंभीर आरोप लगाए थे और उनके खिलाफ कार्रवाई की थी।
इससे पहले ट्रंप ने वेनेजुएला के तेल उद्योग में अमेरिकी कंपनियों की संभावित वापसी की बात भी कही थी। उनका तर्क रहा है कि अतीत में वेनेजुएला में अमेरिकी कंपनियों की कई संपत्तियों का राष्ट्रीयकरण किया गया था। अब अमेरिकी प्रशासन वहां के तेल संसाधनों को लेकर नई रणनीति पर आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।
Trump: वेनेजुएला के पास कितना तेल है
वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े प्रमाणित कच्चे तेल भंडार वाले देशों में शामिल है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देश के पास करीब 303 अरब बैरल का कच्चा तेल भंडार है। यह वैश्विक स्तर पर मौजूद तेल संसाधनों का बड़ा हिस्सा है।
हालांकि विशाल भंडार होने के बावजूद वेनेजुएला का वास्तविक तेल उत्पादन उसकी क्षमता के मुकाबले काफी कम रहा है। देश में लंबे समय से आर्थिक संकट, कमजोर बुनियादी ढांचे और तेल उद्योग में निवेश की कमी जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।
Trump: विशाल भंडार के बावजूद उत्पादन कम
विशेषज्ञों के मुताबिक वेनेजुएला के तेल भंडार का बड़ा हिस्सा पहले से ही चिन्हित और मैप किया जा चुका है। इसका मतलब है कि वहां नए तेल भंडार खोजने के बजाय मौजूदा संसाधनों को निकालने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ज्यादा जोर दिया जा सकता है।
लेकिन तेल निकालने के लिए जरूरी बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षमता की कमी के कारण देश अपने विशाल संसाधनों का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर पा रहा है। इसी वजह से दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक होने के बावजूद वैश्विक तेल उत्पादन में वेनेजुएला की हिस्सेदारी काफी सीमित है।
Trump: अमेरिका को तेल डील से क्या फायदा होगा
अगर समझौते के तहत वेनेजुएला से तेल उत्पादन और निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी होती है, तो अमेरिका को कच्चे तेल की अतिरिक्त आपूर्ति मिल सकती है। इससे अमेरिकी ऊर्जा बाजार में आपूर्ति बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि तेल की कीमतें केवल किसी एक देश की आपूर्ति पर निर्भर नहीं करतीं। वैश्विक मांग, युद्ध, प्रतिबंध, परिवहन लागत और दूसरे तेल उत्पादक देशों के उत्पादन जैसे कई कारक कीमतों को प्रभावित करते हैं। इसलिए इस समझौते का अमेरिकी पेट्रोल की कीमतों पर वास्तविक असर आने वाले समय में ही स्पष्ट होगा।
Trump: अमेरिका के रणनीतिक तेल भंडार पर भी दबाव
अमेरिका में ऊर्जा बाजार को लेकर यह घटनाक्रम ऐसे समय आया है जब रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार में भी कमी की खबरें सामने आई हैं। अंतरराष्ट्रीय तनाव और लंबे समय तक चलने वाले संघर्षों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ा है।
ऐसे माहौल में वेनेजुएला जैसे बड़े तेल भंडार वाले देश के संसाधनों तक पहुंच अमेरिका के लिए रणनीतिक महत्व रखती है। ट्रंप प्रशासन के लिए यह समझौता ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने के साथ-साथ वैश्विक तेल बाजार में अमेरिकी प्रभाव बढ़ाने का माध्यम भी बन सकता है।
Trump: आगे क्या होगा
वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने से उत्पादन क्षमता में सुधार की संभावना बन सकती है। लेकिन इसके लिए तेल उद्योग के बुनियादी ढांचे, निवेश, तकनीक और संचालन व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी होगा।
इस समझौते का असर केवल अमेरिका और वेनेजुएला तक सीमित नहीं रहेगा। दुनिया के तेल बाजार में अतिरिक्त आपूर्ति आने पर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि समझौते की वास्तविक शर्तें, निवेश की मात्रा और तेल उत्पादन बढ़ाने की समयसीमा सामने आने के बाद ही इसके व्यापक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
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