Indore Cyber Crime इंदौर क्राइम ब्रांच ने ऑपरेशन फास्ट 2.0 के तहत साइबर ठगी के लिए फर्जी सिम उपलब्ध कराने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों से हासिल की गई सिम का इस्तेमाल महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में साइबर अपराधों के लिए किया गया। इन मामलों में करीब 84.58 लाख रुपये की ठगी सामने आई है।
संदिग्ध मोबाइल नंबरों से खुली फर्जी सिम की कड़ी
Indore Cyber Crime राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय, भोपाल से इंदौर क्राइम ब्रांच को संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जानकारी मिली थी। जांच के दौरान चार नंबरों का इस्तेमाल महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में दर्ज साइबर अपराधों में पाए जाने के बाद पुलिस ने इन नंबरों के स्रोत की पड़ताल शुरू की।
जांच आगे बढ़ने पर इन सिम कार्ड का कनेक्शन यशवंत रोड स्थित राउत कलेक्शन से सामने आया। पुलिस ने इसके बाद सिम उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क की जानकारी जुटाई।
दुकान से सिम लेकर साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का आरोप
Indore Cyber Crime क्राइम ब्रांच ने कार्रवाई करते हुए राजेंद्र रावत, आनंद वासरे और सूरज सिंह को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार राजेंद्र रावत स्वर्णबाग कॉलोनी, विजय नगर का निवासी है और यशवंत रोड पर दुकान संचालित करता था। आरोप है कि इसी दुकान से संदिग्ध तरीके से सिम उपलब्ध कराई जाती थीं।
वहीं आनंद वासरे मालवा मिल और सूरज सिंह पाटनीपुरा क्षेत्र का निवासी बताया गया है। पुलिस का आरोप है कि दोनों सिम कार्ड को आगे साइबर अपराधियों तक पहुंचाने का काम करते थे।
84.58 लाख की ठगी से जुड़ी जांच जारी
Indore Cyber Crime पुलिस के मुताबिक, इन सिम कार्ड का इस्तेमाल महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में हुई साइबर ठगी की वारदातों में किया गया, जिनमें कुल करीब 84 लाख 58 हजार रुपये की धोखाधड़ी सामने आई है।
क्राइम ब्रांच अब आरोपियों से पूछताछ कर रही है। पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। आरोपियों के खिलाफ आईटी एक्ट समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है और आगे की जांच जारी है।
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