BY
Yoganand Shrivastava
DAVV New Courses देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में विद्यार्थियों की बढ़ती संख्या और रोजगारोन्मुख शिक्षा की मांग को देखते हुए नए पाठ्यक्रम शुरू करने, सीटों में वृद्धि करने और आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। कार्यपरिषद सदस्य डॉ. ए.के. द्विवेदी ने विश्वविद्यालय के समग्र विकास के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
DAVV New Courses: Performing Arts और AYUSH जैसे नए विभागों से मिलेगा विस्तार
डॉ. द्विवेदी ने हाल ही में शुरू किए गए Performing Arts विभाग का स्वागत करते हुए इसे विश्वविद्यालय के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की रुचि और समय की आवश्यकता के अनुरूप नए विभागों की स्थापना से शैक्षणिक अवसर बढ़ेंगे और विश्वविद्यालय को नई पहचान मिलेगी।
उन्होंने School of AYUSH की स्थापना के लिए चल रहे प्रयासों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, यह संस्थान आयुष शिक्षा, शोध और नवाचार के क्षेत्र में DAVV को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत पहचान दिला सकता है। इससे आयुष से जुड़े नए कोर्स और अनुसंधान गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
DAVV New Courses: रोजगारपरक और डिमांड आधारित पाठ्यक्रमों की बढ़ रही लोकप्रियता
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि BALLB, B.Com (Hons.), MBA Finance, MBA Marketing, MBA HR, Integrated MBA और IET के B.Tech (CS, IT एवं Civil) जैसे पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि यह दर्शाती है कि रोजगारपरक शिक्षा की मांग लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने बताया कि Integrated MBA जैसे कोर्स में शुरुआती दौर में ही सीटें भर जाना इसकी लोकप्रियता का प्रमाण है। ऐसे में विश्वविद्यालय को स्किल-बेस्ड, डिमांड-बेस्ड और रोजगारोन्मुख पाठ्यक्रमों का विस्तार करना चाहिए, ताकि छात्रों को बेहतर करियर अवसर मिल सकें।
DAVV New Courses: सीटों के साथ स्मार्ट क्लासरूम और आधुनिक भवनों की जरूरत
उन्होंने कहा कि जिन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी आवेदन कर रहे हैं, वहां सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ शैक्षणिक ढांचे का भी विस्तार जरूरी है। इसके लिए स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक अकादमिक भवन और बहुमंजिला शैक्षणिक परिसरों की चरणबद्ध योजना तैयार की जानी चाहिए।
डॉ. द्विवेदी का मानना है कि यदि विश्वविद्यालय 50 से 100 करोड़ रुपये तक का चरणबद्ध निवेश आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर करता है, तो इसे खर्च नहीं बल्कि भविष्य की शिक्षा में निवेश के रूप में देखा जाना चाहिए। इससे विश्वविद्यालय की गुणवत्ता, क्षमता और प्रतिस्पर्धात्मकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।



