Iran: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने लगातार 12वीं रात ईरान के ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ये अभियान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर चलाया जा रहा है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनसे क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को खतरा पैदा हो सकता है।
दूसरी ओर, ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज कर दी है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सहयोगी देशों की ओर मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आई हैं। इससे पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
Iran: अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अभियान जारी रखने की कही बात
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि सैन्य अभियान फिलहाल जारी रहेगा। उनका कहना है कि इन कार्रवाइयों का मकसद ईरान की उस क्षमता को सीमित करना है, जिससे वह समुद्री मार्गों से गुजरने वाले आम नाविकों और व्यावसायिक जहाजों के लिए खतरा पैदा कर सकता है।
अमेरिका का दावा है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है और इसी उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है।
Iran: ट्रंप ने ईरान को दी थी कड़ी चेतावनी
इन हमलों से एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी जहाज पर मिसाइल, रॉकेट, ड्रोन या किसी अन्य हथियार से हमला किया गया, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में ईरान के रणनीतिक ढांचे को निशाना बनाएगा।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा था कि ऐसे किसी भी हमले की स्थिति में अमेरिका ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर कार्रवाई करेगा।
Iran: होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का सबसे बड़ा केंद्र
वर्तमान संघर्ष के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक चिंता का विषय बना हुआ है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा समुद्री मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण इस क्षेत्र में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियां भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, क्योंकि लंबे समय तक व्यवधान रहने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर असर पड़ सकता है।
Iran: ईरान ने मिसाइल और ड्रोन से किया जवाबी हमला
अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरानी सेना ने भी जवाबी कदम उठाए हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन गतिविधियां बढ़ी हैं।
कुवैत की सेना ने बताया कि उसका एयर डिफेंस सिस्टम संदिग्ध ड्रोन गतिविधियों पर लगातार नजर रखे हुए है और संभावित खतरों को रोकने के लिए कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील भी की है।
Iran: खाड़ी देशों में सुरक्षा व्यवस्था की गई मजबूत
ईरान की जवाबी कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और वायु रक्षा प्रणाली को सक्रिय कर दिया है। संवेदनशील सैन्य ठिकानों और महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव इसी तरह जारी रहा, तो इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पर पड़ सकता है।
Iran: लाल सागर में हूती विद्रोहियों ने खोला नया मोर्चा
इस बीच, ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने भी लाल सागर में अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। हूती समूह ने दावा किया है कि उसने सऊदी अरब से जुड़े दो तेल टैंकरों को निशाना बनाते हुए सैन्य अभियान चलाया।
हूतियों का आरोप है कि संबंधित जहाजों ने उनकी घोषित समुद्री नाकेबंदी का उल्लंघन किया था। इससे पहले हूती संगठन लाल सागर में समुद्री प्रतिबंध लागू करने की घोषणा भी कर चुका है।
Iran: वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री मार्गों पर खतरे के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर दोनों अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग हैं।
यदि इन क्षेत्रों में सैन्य गतिविधियां और तेज होती हैं, तो तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर व्यापक असर पड़ सकता है।
Iran: क्षेत्रीय तनाव पर दुनिया की नजर
ईरान और अमेरिका के बीच लगातार जारी सैन्य कार्रवाइयों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है। कई देश स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और क्षेत्र में तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।
हालांकि फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम दिखाई दे रहे हैं, लेकिन मौजूदा घटनाक्रम ने पश्चिम एशिया को एक बार फिर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के केंद्र में ला खड़ा किया है।
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