Report: Ratan kumar
Art of Living Jamtara Ramayan Shivir ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ (Art of Living) परिवार, जामताड़ा के तत्वावधान में 7 से 13 वर्ष के बच्चों के लिए आयोजित पांच दिवसीय विशेष ‘रामायण शिविर कोर्स’ का रविवार, 14 जून 2026 को अत्यंत भव्य और भक्तिमय माहौल में समापन हो गया। न्यू टाउन स्थित ओल्ड बीएसएनएल गली में इंदु प्रभा के आवासीय परिसर में आयोजित इस शिविर में बच्चों ने खेल-खेल में सनातन संस्कृति, नैतिक मूल्य और रामायण के महान आदर्शों को सीखा।
Art of Living Jamtara Ramayan Shivir बच्चों की सस्वर चौपाइयों से गूंजा परिसर, सजे सजीव रूप
यह विशेष कोर्स आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक व आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर द्वारा बच्चों के सर्वांगीण विकास (Holistic Development) को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

- सांस्कृतिक प्रस्तुतियां: पांच दिनों तक चले इस प्रशिक्षण के बाद समापन समारोह में बच्चों ने जब रामायण की चौपाइयों, दोहों और हनुमान चालीसा का सस्वर पाठ किया, तो पूरा वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
- सजीव झांकी: शिविर में शामिल बच्चों ने भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और संकटमोचन हनुमान जी की मनमोहक वेशभूषा धारण की। उनकी इन आकर्षक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और अभिनय को देखकर वहां मौजूद सभी अभिभावक और अतिथि भावविभोर हो उठे।
Art of Living Jamtara Ramayan Shivir “रामायण केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने का आधार”— डॉ. संध्या सिन्हा
इस विशेष कोर्स का सफल संचालन आर्ट ऑफ लिविंग की सीनियर फैकल्टी डॉ. संध्या सिन्हा ने किया। आधुनिक युग में ऐसे संस्कारों की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा:
“आज के डिजिटल और आधुनिक दौर में नई पीढ़ी के बच्चों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों व नैतिक मूल्यों से जोड़ना सबसे बड़ी जरूरत है। रामायण केवल एक धार्मिक ग्रंथ मात्र नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन जीने की कला (Art of Living) सिखाने वाला सर्वश्रेष्ठ मार्गदर्शक है। इन पांच दिनों में बच्चों ने खेल और कहानियों के जरिए माता-पिता का सम्मान करना, आपसी भाईचारा, कड़ा अनुशासन और विपरीत परिस्थितियों में धैर्य रखना जैसे अनमोल मानवीय मूल्यों को आत्मसात किया है।”
Art of Living Jamtara Ramayan Shivir सकारात्मक बदलाव से गदगद हुए अभिभावक
कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे अभिभावकों ने भी आर्ट ऑफ लिविंग की इस अनूठी पहल की मुक्त कंठ से सराहना की। कई माता-पिता ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि मात्र पांच दिनों के भीतर ही बच्चों के रोजमर्रा के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव, बड़ों के प्रति आदर और अपनी संस्कृति के प्रति एक नया सम्मान देखने को मिल रहा है।

मीडिया कोऑर्डिनेटर विजय भगत ने जामताड़ा के नागरिकों का आभार जताते हुए कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य समाज और बच्चों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करना है और भविष्य में भी ऐसे बाल संस्कार शिविर लगातार आयोजित किए जाते रहेंगे। कार्यक्रम के आयोजन और इसे सफल बनाने में इंदु प्रभा, रीना द्विवेदी, अर्चना चौधरी, किरण मंडल, श्रीकांत प्रसाद, शारदा प्रतिमा, अंजू भगत एवं शत्रुघ्न यादव का विशेष और सक्रिय योगदान रहा। कार्यक्रम के अंत में सामूहिक महाप्रसाद वितरण हुआ और पूरा परिसर ‘जय श्री राम’ तथा ‘जय गुरुदेव’ के जयघोष से गुंजायमान रहा।





