Hormuz Strait Crisis: ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य संकट को लेकर चीन से बड़ी उम्मीद जताई है। ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच होने वाली बैठक में होर्मुज संकट का मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। उनका कहना है कि इस संकट का असर केवल ईरान या पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि चीन समेत दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है।
Hormuz Strait Crisis: बीजिंग में ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात पर टिकी निगाहें
डोनाल्ड ट्रंप बुधवार को बीजिंग पहुंचे, जहां उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अहम बैठक प्रस्तावित है। इस बैठक को वैश्विक व्यापार, ऊर्जा संकट और पश्चिम एशिया की स्थिति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ईरानी उप विदेश मंत्री ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव के कारण चीन को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में इस संकट का समाधान निकालना चीन के हित में भी है।
Hormuz Strait Crisis: ईरान बोला- चीन से अलग से कुछ कहने की जरूरत नहीं
जब उनसे पूछा गया कि ईरान इस शिखर सम्मेलन से क्या उम्मीद करता है, तो गरीबाबादी ने कहा कि ईरान और चीन के रिश्ते काफी पुराने और मजबूत हैं। उन्होंने कहा कि चीन अच्छी तरह समझता है कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर पड़ रहा है।
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की आक्रामक नीतियों और होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव की वजह से कई देश प्रभावित हो रहे हैं।
Hormuz Strait Crisis: ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के लिए अमेरिका को ठहराया जिम्मेदार
ईरानी उप विदेश मंत्री ने दावा किया कि दुनिया भर में तेल और गैस की बढ़ती कीमतों के पीछे ईरान नहीं, बल्कि अमेरिका की नीतियां जिम्मेदार हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय बाजार प्रभावित हुए हैं।
गरीबाबादी ने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान भविष्य में भी होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह शुल्क उन सेवाओं के बदले लिया जाता है, जो जहाजों को उपलब्ध कराई जाती हैं।
Hormuz Strait Crisis: होर्मुज में टोल वसूली पर ईरान का पक्ष
ईरान ने कहा कि उसने ऐसा कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता नहीं किया है, जो उसे इस तरह का शुल्क लेने से रोकता हो। हालांकि, तेहरान ने यह भी साफ किया कि वह अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन नहीं करेगा।
गरीबाबादी के अनुसार, ईरान केवल अपनी सुरक्षा और समुद्री सेवाओं के दायरे में रहकर कार्रवाई कर रहा है।
Hormuz Strait Crisis: भारत के जहाजों को लेकर क्या बोला ईरान?
ईरानी उप विदेश मंत्री ने भारत और ईरान के बीच बेहतर संबंधों का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि 11 भारतीय जहाज जल्द ही होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर सकेंगे। उन्होंने संकेत दिया कि जिन देशों का रुख तटस्थ रहेगा, उनके जहाजों को कम दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जो देश ईरान विरोधी सैन्य कार्रवाई का समर्थन करेंगे, उनके जहाजों के लिए स्थिति कठिन हो सकती है।
Hormuz Strait Crisis: परमाणु मुद्दे पर बातचीत को तैयार ईरान
ईरान ने एक बार फिर कहा कि वह परमाणु कार्यक्रम समेत सभी विवादित मुद्दों पर बातचीत के लिए तैयार है। तेहरान का कहना है कि क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनाए रखने के लिए कूटनीतिक रास्ता सबसे बेहतर विकल्प है।
Hormuz Strait Crisis: क्या है होर्मुज जलडमरूमध्य संकट?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी का प्रमुख समुद्री मार्ग है और इसे दुनिया के सबसे अहम तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है। वैश्विक स्तर पर होने वाले तेल और गैस निर्यात का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के बाद 28 फरवरी से इस क्षेत्र में हालात गंभीर बने हुए हैं। संघर्ष शुरू होने से पहले हर दिन करीब 140 जहाज इस मार्ग से गुजरते थे, लेकिन तनाव बढ़ने के बाद एक समय ऐसा आया जब 24 घंटे में केवल तीन जहाज ही यहां से गुजर पाए।
Hormuz Strait Crisis: भारत समेत कई देशों पर पड़ा असर
होर्मुज मार्ग में बाधा आने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी गई है। इसका असर भारत समेत कई ऊर्जा आयातक देशों पर पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संकट लंबा चला तो वैश्विक महंगाई और ऊर्जा आपूर्ति दोनों प्रभावित हो सकती हैं।
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