Sambhal उत्तर प्रदेश के संभल जनपद में शिक्षा के नाम पर हो रही “वसूली” के खिलाफ व्यापारियों ने मोर्चा खोल दिया है। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैसिया के सख्त निर्देशों के बावजूद निजी स्कूलों में एनसीईआरटी (NCERT) की जगह निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें थोपी जा रही हैं। इस भ्रष्टाचार के विरोध में चंदौसी के युवा उद्योग व्यापार मंडल ने किताबों को तराजू में नोटों की गड्डियों के साथ तौलकर अपना विरोध दर्ज कराया है।

Sambhal नोटों की गड्डी बनाम किताबें: भ्रष्टाचार पर अनूठा प्रहार
चंदौसी के ब्रह्म बाजार में युवा उद्योग व्यापार मंडल के नगर अध्यक्ष अन्नू कुमार के नेतृत्व में एक बेहद चर्चित प्रदर्शन किया गया। व्यापारियों ने तराजू के एक पलड़े में निजी प्रकाशन की किताबें रखीं और दूसरे पलड़े में नोटों की गड्डियां। यह प्रदर्शन इस बात का प्रतीक था कि निजी स्कूल और बुक सेलर मिलकर शिक्षा को केवल मुनाफे का जरिया बना चुके हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की तुलना में कई गुना महंगी हैं, जिससे अभिभावकों का आर्थिक शोषण हो रहा है।
Sambhal जिलाधिकारी के आदेश को ठेंगा, पुरानी कार्रवाई का भी नहीं खौफ
जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैसिया ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि कक्षा 1 से 12वीं तक केवल एनसीईआरटी की किताबों से ही पढ़ाई कराई जाए। गौरतलब है कि पिछले वर्ष भी नियम तोड़ने पर दर्जनों स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाया गया था। इसके बावजूद, स्कूल प्रशासन और बुक सेलरों की मिलीभगत बदस्तूर जारी है। कुछ बुक सेलर भले ही कागजों पर नियम पालन का दावा कर रहे हों, लेकिन धरातल पर निजी कमीशन के खेल में सरकारी नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है।

Sambhal निर्धारित दुकानों का ‘सिंडिकेट’ और अभिभावकों की मजबूरी
भ्रष्टाचार का आलम यह है कि स्कूल प्रशासन बाकायदा पर्ची लिखकर अभिभावकों को चुनिंदा बुक सेलरों के पास भेजता है। ‘निर्धारित दुकान’ से ही सेट खरीदने की मजबूरी के कारण इन दुकानों पर सुबह से ही भीड़ लग रही है। अभिभावकों का कहना है कि स्कूलों और दुकानदारों का कमीशन पहले से तय होता है, जिसके चलते उन्हें बाजार से कहीं ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन रसूखदार स्कूल संचालकों पर कोई कठोर शिकंजा कसेगा?





