BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi : भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्र सरकार संसद के इसी सत्र में लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और महिला आरक्षण को लागू करने के लिए एक क्रांतिकारी विधेयक लाने की तैयारी में है। इस नए प्रस्ताव के अनुसार, लोकसभा की कुल सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 किया जाएगा, जिनमें से 33% यानी 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।

New Delhi 2011 की जनगणना और परिसीमन का आधार
सूत्रों के मुताबिक, इस बदलाव के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों को आधार बनाया जा रहा है। सीटों के इस विस्तार के लिए सरकार मौजूदा सत्र में संविधान संशोधन विधेयक पेश कर सकती है। सीटों का बंटवारा राज्यों की जनसंख्या के आनुपातिक आधार पर किया जाएगा, ताकि दक्षिण भारतीय राज्यों की चिंताओं को दूर किया जा सके और क्षेत्रीय संतुलन बना रहे। इस महा-योजना को लेकर जहां विपक्ष रणनीति बनाने में जुटा है, वहीं NDA ने भी अपना रोडमैप तैयार कर लिया है।

New Delhi प्रमुख राज्यों में सीटों का नया गणित
सीटों में वृद्धि के बाद देश के राजनीतिक नक्शे में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे। सर्वाधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो जाएगी। इसी तरह बिहार में 60, पश्चिम बंगाल में 63 और महाराष्ट्र में 72 सीटें होंगी। छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों जैसे दिल्ली में भी सीटों की संख्या 7 से बढ़कर 11 होने का प्रस्ताव है।

New Delhi प्रस्तावित राज्यवार सूची (झलक)
| राज्य | वर्तमान सीटें | प्रस्तावित सीटें |
| उत्तर प्रदेश | 80 | 120 |
| महाराष्ट्र | 48 | 72 |
| पश्चिम बंगाल | 42 | 63 |
| बिहार | 40 | 60 |
| तमिलनाडु | 39 | 59 |
| गुजरात/राजस्थान | 26/25 | 39/38 |
New Delhi दक्षिण बनाम उत्तर का संतुलन
लोकसभा विस्तार को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ने बीच का रास्ता निकाला है। सीटों की संख्या आनुपातिक आधार पर बढ़ाई जा रही है, जिससे उत्तर भारत के साथ-साथ दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे केरल में 30 और आंध्र प्रदेश में 38 सीटें) को भी पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिल सके। यह कदम न केवल महिला सशक्तिकरण की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, बल्कि जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच की दूरी को भी कम करेगा।
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