संवाददाता- प्रताप सिंह बघेल
Morena राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित एक विशेष जन गोष्ठी को संबोधित करते हुए संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने भारत के गौरवशाली अतीत और भविष्य की चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को पुनः ‘विश्व गुरु’ के पद पर आसीन करना केवल किसी एक संस्था का नहीं, बल्कि संपूर्ण समाज का साझा कर्तव्य है।

वैश्विक संकट और भारतीय समाधान
Morena डॉ. कृष्ण गोपाल ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज दुनिया के शक्तिशाली राष्ट्र भाषावाद, रंगभेद और आंतरिक संघर्षों से जूझ रहे हैं। इसके विपरीत, भारत विश्व का एकमात्र ऐसा राष्ट्र है जहाँ विविध भाषाओं और पंथों के लोग शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के साथ रहते हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में भारत ने ही दुनिया को शिक्षा, अर्थशास्त्र, समाजवाद और संस्कृति का पाठ पढ़ाया था, जिसे विदेशी आक्रांताओं ने नष्ट करने का प्रयास किया।

“हिंदू” की परिभाषा: सबको समाहित करने वाला विराट हृदय
Morena संगठन की विचारधारा को स्पष्ट करते हुए डॉ. गोपाल ने कहा कि “हिंदू वह है जो दूसरों की चिंता करता है और सर्वजन के कल्याण की प्रार्थना करता है।” उन्होंने हिंदू समाज को एक ऐसे विराट हृदय वाले व्यक्तित्व के रूप में परिभाषित किया जिसमें सबको समाहित करने की शक्ति है। उन्होंने कहा कि एक हजार वर्षों तक धर्म और संस्कृति पर हुए आघातों के बावजूद भारत की आत्मा जीवित है, क्योंकि यहाँ का मूल विचार सबको साथ लेकर चलने का है।
संघर्षों से शक्ति तक: आरएसएस की यात्रा
Morena संघ के इतिहास और प्रतिबंधों पर चर्चा करते हुए सह-सरकार्यवाह ने बताया कि:
- चुनौतियां: नागपुर से शुरू हुए इस संगठन को अपनी बढ़ती लोकप्रियता के कारण तीन बार प्रतिबंधों का सामना करना पड़ा।
- अविचल संकल्प: अपने ही देश में विरोध और अवरोधों के बावजूद संघ आज पूरी शक्ति के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटा है।
- सामाजिक समरसता: जाति-पांति की दीवारों को ढहाने के लिए ‘समरसता अभियान’ चलाया जा रहा है।
उन्होंने अंत में आह्वान किया कि भारत को उसके खोए हुए गौरव तक पहुँचाने के लिए सभी वर्गों को एकजुट होकर जाति-भेद से ऊपर उठना होगा।





