Farrukhabad: 21 हजार मानदेय की मांग को लेकर आशा कार्यकर्ताओं का हल्लाबोल, कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

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Farrukhabad

Report: Sartaj khan

Farrukhabad जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी लंबित मांगों को लेकर एक बार फिर हुंकार भरी है। डिप्टी सीएम के आश्वासन पर चार दिन पहले हड़ताल समाप्त करने के बाद, कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति न बनने से नाराज आशा वर्कर्स ने शुक्रवार को कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया। यूनियन की जिला अध्यक्ष मिथिलेश सोलंकी और सचिव सपना कटियार के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने अपनी आवाज बुलंद की।

डिप्टी सीएम के आश्वासन के बाद भी असंतोष

Farrukhabad जिले में तैनात लगभग 1600 आशा कार्यकर्ताओं ने अपनी 14 सूत्री मांगों को लेकर लगातार 56 दिनों तक हड़ताल की थी। चार दिन पहले प्रदेश के डिप्टी सीएम के आश्वासन पर हड़ताल स्थगित की गई थी। हालांकि, कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी मुख्य मांगों पर अभी भी ठोस विचार नहीं किया गया है। इसी के विरोध में शुक्रवार सुबह सभी आशा वर्कर्स सीएमओ कार्यालय परिसर में एकत्रित हुईं और वहां से जुलूस के रूप में नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचीं।

राष्ट्रपति के नाम 6 सूत्री मांग पत्र: प्रमुख मांगें

Farrukhabad एसडीएम गजराज सिंह के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति को भेजे गए ज्ञापन में कार्यकर्ताओं ने निम्नलिखित प्रमुख मांगें रखी हैं:

  • सरकारी दर्जा: आशा कार्यकर्ताओं को पूर्णकालिक ‘सरकारी कर्मचारी’ घोषित किया जाए।
  • निश्चित मानदेय: आशा कार्यकर्ताओं को 21,000 रुपये और आशा संगिनियों को 28,000 रुपये प्रतिमाह मानदेय दिया जाए।
  • बीमा सुरक्षा: 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 50 लाख रुपये का जीवन बीमा सुनिश्चित हो।
  • सेवानिवृत्ति लाभ: रिटायरमेंट के समय ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाए।
  • सामाजिक सुरक्षा: सभी कार्यकर्ताओं को ईपीएफ (EPF) और ईएसआई (ESI) की सदस्यता दी जाए।

“अधिकार मिलने तक जारी रहेगा संघर्ष”

Farrukhabad प्रदर्शन के दौरान यूनियन अध्यक्ष मिथिलेश सोलंकी ने कहा कि आशा कार्यकर्ता दिन-रात ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करती हैं, लेकिन उन्हें उचित पारिश्रमिक और सुरक्षा नहीं मिल रही है। हाथों में नारे लिखी तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी इन 6 सूत्री मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो वे बड़े आंदोलन के लिए विवश होंगी।

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