Report: Somnath mishra
Jabalpur : केंद्र सरकार द्वारा लागू किए जा रहे चार नए श्रम कोड (Labour Codes) के विरोध में आज संस्कारधानी जबलपुर में भी भारी विरोध देखने को मिला। देशव्यापी आह्वान पर जबलपुर स्थित सामरिक महत्व की गन कैरिज फैक्ट्री (GCF) के कर्मचारियों ने अपनी आवाज बुलंद की। ‘मजदूर संघ हथौड़ा’ के बैनर तले कर्मचारियों ने इस नीतिगत बदलाव को श्रमिक हितों पर कुठाराघात बताते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।
नए श्रम कानूनों को बताया ‘मजदूर विरोधी’, 29 पुराने कानूनों की विदाई पर नाराजगी
Jabalpur कर्मचारी नेताओं का मुख्य विरोध केंद्र सरकार के उस फैसले पर है, जिसमें 29 पुराने श्रम कानूनों को समाहित कर चार नए कोड बनाए गए हैं। ऑल इंडिया डिफेंस एम्पलाइज फेडरेशन (AIDEF) के मार्गदर्शन में प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने स्पष्ट किया कि ये नए कानून उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाने वाले और मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाले हैं। उन्होंने सरकार की इस नीति को पूरी तरह से जनविरोधी करार दिया है।

प्रतीकात्मक विरोध: एक घंटे देरी से काम पर लौटे कर्मचारी
Jabalpur विरोध के एक अनोखे तरीके के रूप में, GCF के सैकड़ों कर्मचारी सुबह तय समय पर फैक्ट्री तो पहुंचे, लेकिन उन्होंने विरोध स्वरूप एक घंटे की देरी से अपनी ड्यूटी शुरू की। इस दौरान गेट पर जमकर नारेबाजी हुई और कर्मचारियों ने अपनी एकजुटता का प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यह एक घंटे की देरी सरकार के लिए एक चेतावनी है कि यदि नीतियां नहीं बदली गईं, तो उत्पादन पर भी इसका असर पड़ सकता है।

मांगे न माने जाने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी
Jabalpur मजदूर संघ हथौड़ा के पदाधिकारियों ने मीडिया से चर्चा करते हुए दो टूक कहा कि यह केवल एक शुरुआत है। उनकी मांग है कि इन विवादित श्रम कोड्स को तुरंत निरस्त किया जाए और पुराने कानूनों को बहाल रखा जाए जो श्रमिकों को सुरक्षा प्रदान करते थे। कर्मचारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया, तो आने वाले समय में यह आंदोलन केवल प्रतीकात्मक न रहकर एक व्यापक और उग्र रूप धारण कर लेगा।
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