Report: Imran khan
Chhatarpur (मध्य प्रदेश): बागेश्वर धाम में सातवें कन्या विवाह महोत्सव का शंखनाद हो चुका है। धाम के पीठाधीश पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने प्रेस वार्ता के दौरान इस 10 दिवसीय आयोजन की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि यह महोत्सव अब अंतरराष्ट्रीय स्वरूप ले चुका है। इस वर्ष न केवल भारत के कोने-कोने से संत और महापुरुष शिरकत कर रहे हैं, बल्कि अमेरिका सहित आठ देशों के राजदूत भी नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देने बागेश्वर धाम पहुँच रहे हैं।

13 से 15 फरवरी तक उत्सव का विशेष आकर्षण
Chhatarpur महाराज जी ने बताया कि वैसे तो महोत्सव 10 दिनों का है, लेकिन 13 से 15 फरवरी तक के तीन दिन मुख्य अनुष्ठानों के लिए समर्पित रहेंगे:
- 13 फरवरी: पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हल्दी की रस्म।
- 14 फरवरी: बेटियों के हाथों में सजेगी मेहंदी।
- 15 फरवरी: भव्य बारात और विवाह संस्कार का आयोजन। दूल्हों के लिए विशेष बारात निकाली जाएगी, जिसके बाद 50-50 के समूहों में वरमाला कार्यक्रम होगा। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विद्वान ब्राह्मण सभी 302 जोड़ों का पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराएंगे।
302 बेटियों का चयन: नेपाल सहित 10 राज्यों की कन्याएं शामिल
Chhatarpur इस वर्ष प्राप्त हुए 1648 आवेदनों में से गहन जांच के बाद 302 बेटियों का चयन किया गया है। सामाजिक समरसता की मिसाल पेश करते हुए इस सूची में हर वर्ग को स्थान दिया गया है:

- विवरण: चयनित बेटियों में 60 अनाथ, 8 दिव्यांग और 138 पितृहीन कन्याएं शामिल हैं।
- क्षेत्र: मध्य प्रदेश से 229, उत्तर प्रदेश से 56 और नेपाल सहित छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार जैसे राज्यों की बेटियां इस उत्सव का हिस्सा बनेंगी।
- जातिगत समीकरण: अनुसूचित जाति की 77, जनजाति की 28, पिछड़ा वर्ग की 173 और सामान्य वर्ग की 24 बेटियों का विवाह कराया जा रहा है।
उपहार में गृहस्थी का सामान और 30 हजार की एफडी
Chhatarpur बागेश्वर धाम की ओर से बेटियों की विदाई को यादगार बनाने के लिए उपहारों की लंबी सूची तैयार की गई है।

- आध्यात्मिक भेंट: श्री बालमुकुंद और बालाजी सरकार का विग्रह, रामचरितमानस और वस्त्र।
- घरेलू सामान: एलईडी टीवी, फ्रिज (वॉटर हीटर), सिलाई मशीन, अलमारी, डबल बेड, सोफा सेट, मिक्सर ग्राइंडर, गैस चूल्हा और बर्तन सेट।
- वित्तीय सुरक्षा: इस वर्ष एक नई पहल करते हुए वर-वधू के संयुक्त नाम से 30,000 रुपये की एफडी (Fixed Deposit) भी की जा रही है, ताकि उनके दांपत्य जीवन की शुरुआत आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो सके।





