BY
Yoganand Shrivastava
Mumbai : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में सरसंघचालक मोहन भागवत ने एक ऐतिहासिक बयान दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ में पद और जिम्मेदारी का आधार जाति नहीं, बल्कि केवल कर्तव्यनिष्ठा और योग्यता है। भागवत ने कहा कि भविष्य में अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से भी कोई व्यक्ति सरसंघचालक के पद तक पहुंच सकता है।
सामाजिक समरसता और आरक्षण पर स्पष्ट रुख
Mumbai जातिगत भेदभाव को समाज के लिए हानिकारक बताते हुए मोहन भागवत ने कहा कि जो वर्ग ऐतिहासिक रूप से पिछड़ गए हैं, उन्हें सहारा देकर ऊपर लाना समाज का सामूहिक उत्तरदायित्व है। उन्होंने ‘संविधान सम्मत आरक्षण’ को संघ का पूर्ण समर्थन दोहराते हुए कहा कि जब तक समाज में विषमता है, तब तक आरक्षण अनिवार्य है। धर्म परिवर्तन के मुद्दे पर उन्होंने स्पष्ट किया कि आस्था व्यक्तिगत चुनाव है, लेकिन प्रलोभन या जबरन धर्मांतरण स्वीकार्य नहीं है; ऐसे मामलों में ‘घर वापसी’ ही समाधान है।
मुस्लिम समाज और अखंड भारत का विजन
Mumbai अल्पसंख्यक समुदाय के साथ संबंधों पर चर्चा करते हुए सरसंघचालक ने एक प्रभावी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “यदि दांतों के बीच जुबान आ जाए, तो हम दांत नहीं तोड़ते।” उन्होंने मुस्लिम समाज को भारतीय समाज का अभिन्न हिस्सा बताया और स्वयंसेवकों को उनके बीच जाकर कार्य करने की प्रेरणा दी। साथ ही, उन्होंने 2047 तक ‘अखंड भारत’ की संकल्पना पर जोर देते हुए कहा कि जो लोग भारत को तोड़ने का सपना देख रहे हैं, वे स्वयं खंडित हो जाएंगे।
आधुनिक तकनीक (AI) और स्वदेशी अर्थव्यवस्था का मंत्र
Mumbai आर्थिक चुनौतियों और बेरोजगारी पर चिंता व्यक्त करते हुए मोहन भागवत ने नई पीढ़ी को ‘स्किल्ड जॉब्स’ के प्रति जागरूक किया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि हमें तकनीक को अपनाना होगा, लेकिन उसका उपयोग इस तरह करना चाहिए कि रोजगार पर संकट न आए। उन्होंने ‘मास प्रोडक्शन’ (बड़े पैमाने पर उत्पादन) के बजाय ‘प्रोडक्शन बाय मासेस’ (आम लोगों द्वारा उत्पादन) का विचार दिया, ताकि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजित हों और भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता विदेशों में भी धाक जमा सके।





