BY
Yoganand Shrivastava
Dehli : इस धूमकेतु की खोज 13 जनवरी 2026 को चिली के अटाकामा रेगिस्तान में स्थित एक रिमोट टेलिस्कोप के जरिए चार शौकिया खगोलशास्त्रियों की टीम ने की थी। MAPS प्रोग्राम के तहत खोजा गया यह पिंड उस समय सूर्य से लगभग 30 करोड़ किलोमीटर दूर था। यह अब तक का सबसे अधिक दूरी पर खोजा जाने वाला ‘सनग्रेजिंग’ धूमकेतु बन गया है, जिसने 1965 के प्रसिद्ध ‘इकेया-सेकी’ का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
‘क्रूट्ज सनग्रेजर’ परिवार का सदस्य
Dehli C/2026 A1 धूमकेतु ‘क्रूट्ज सनग्रेजिंग’ परिवार से संबंध रखता है। खगोलविदों के अनुसार, इस परिवार के धूमकेतु हज़ारों साल पहले टूटे एक विशालकाय धूमकेतु के अवशेष हैं। इतिहास के सबसे चमकीले धूमकेतु, जैसे 1965 का ‘इकेया-सेकी’ (जिसने पूर्णिमा के चांद जितना उजाला किया था) और 2011 का ‘लवजॉय’, इसी परिवार के सदस्य रहे हैं। चूंकि इसकी खोज काफी दूरी से ही कर ली गई है, इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि इसका केंद्र (नाभिक) काफी बड़ा हो सकता है।
सूर्य की सतह के बेहद करीब से उड़ान
Dehli अप्रैल की शुरुआत में यह धूमकेतु सूर्य की सतह से मात्र 1,20,000 किलोमीटर की दूरी से गुजरेगा। यह दूरी खगोलीय दृष्टि से बहुत कम है। इस दौरान सूर्य का भीषण गुरुत्वाकर्षण और गर्मी इसे वाष्पित करने या तोड़ने की कोशिश करेंगे। यदि यह इस ‘अग्निपरीक्षा’ में सफल रहता है और साबुत बच निकलता है, तो इसकी एक लंबी और चमकदार पूंछ दिखाई देगी, जो शाम के समय आसमान को अद्भुत आभा से भर देगी।
भारत में कैसा होगा नजारा?
Dehli विशेषज्ञों के अनुसार, क्रूट्ज परिवार के धूमकेतुओं का सबसे शानदार नजारा दक्षिणी गोलार्ध (Southern Hemisphere) में देखने को मिलता है। भारत के संदर्भ में बात करें, तो देश के दक्षिणी हिस्सों में इसे देखना अधिक आसान होगा। वहीं ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अमेरिका जैसे क्षेत्रों में यह स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है। वैज्ञानिक रूप से इसकी निगरानी ‘SOHO’ स्पेसक्राफ्ट द्वारा की जाएगी, जिससे हमें इसकी दुर्लभ और स्पष्ट तस्वीरें मिल सकेंगी।





