Integrated Healthcare System: “नॉर्थ-ईस्टर्न इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद एंड होम्योपैथी संस्थान (एनईआईएएच)” में “थ्री डी ह्यूमन बॉडी एजुकेशन सिस्टम (वर्चुअल डिसेक्शन टेबल)” और “सेंट्रल रिसर्च लैबोरेटरी” की स्थापना का प्रस्ताव अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस पर जल्द से जल्द अमल किया जाना चाहिए। पारंपरिक चिकित्सा विज्ञान और आधुनिक डायग्नोस्टिक विज्ञान का समन्वय इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर प्रणाली को मजबूत करेगा और आयुष चिकित्सा पद्धतियों की वैश्विक स्वीकार्यता को नई ऊँचाइयों पर ले जाएगा।
Integrated Healthcare System: विद्यार्थियों को दी जाएगी पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा दोनों की ट्रेनिंग
देश के प्रख्यात होम्योपैथी चिकित्साविद् डॉ. ए.के. द्विवेदी ने शिलाँग में एनईआईएएच द्वारा आयोजित वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में कहा कि विद्यार्थियों को आयुर्वेद और होम्योपैथी के पारंपरिक सिद्धांतों जैसे वात, पित्त, कफ तथा होम्योपैथी के मियाजम- सोरा, सिफिलिस और सायकोसिस- के साथ-साथ आधुनिक चिकित्सा में उपयोग होने वाली सभी जांच पद्धतियों की जानकारी दी जानी चाहिए। साथ ही, आधुनिक डायग्नोसिस की ट्रेनिंग भी दी जानी चाहिए ताकि वे रोग की गंभीरता को समझते हुए प्रभावी रोग प्रबंधन कर सकें।
Integrated Healthcare System: आधुनिक जाँच और उपचार उपकरण जरूरी

डॉ. द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि एनईआईएएच में एमआरआई समेत सभी आधुनिक चिकित्सा जांच और उपचार उपकरण उपलब्ध होने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह संस्थान चिकित्सा शिक्षा का विशिष्ट केंद्र बनने के लिए अत्याधुनिक शैक्षणिक और चिकित्सीय सुविधाएँ मुहैया कराए।
Integrated Healthcare System: बैठक में प्रमुख चिकित्साविद् और सदस्यों ने की भागीदारी
बैठक में संस्थान के निदेशक डॉ. विजय कुमार, डॉ. बालकृष्ण पवार, डॉ. बिष्णु चौधरी, डॉ. बी.पी. चायने, डॉ. निरुपम भट्टाचार्य और डॉ. तपन नाथ ऑफलाइन उपस्थित रहे, जबकि कुछ विशिष्ट सदस्य ऑनलाइन जुड़े। अत्यंत प्रभावी सहभागिता के लिए डॉ. द्विवेदी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
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