Edit by: Priyanshi Soni
Dausa School Negligence: राज्य सरकार भले ही शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताती हो, लेकिन दौसा जिले के चांदराना गांव से सामने आई तस्वीरें इन दावों पर सवाल खड़े करती हैं। यहां सरकारी स्कूल के बच्चे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं, जबकि स्कूल भवन निर्माण के लिए 4.5 करोड़ रुपये पहले ही स्वीकृत किए जा चुके हैं।
Dausa School Negligence: बिना फर्नीचर और चटाई के पढ़ाई
चांदराना के सरकारी स्कूल में न तो फर्नीचर है और न ही चटाई। सर्दी के मौसम में भी बच्चे ठंडे फर्श पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। यह हालात शिक्षा की गुणवत्ता और बच्चों के स्वास्थ्य दोनों के लिए चिंता का विषय है।
Dausa School Negligence: कागजों में जर्जर, जमीन पर कोई व्यवस्था नहीं
स्कूल भवन को कागजों में जर्जर घोषित कर दिया गया, लेकिन न तो नया भवन बनाया गया और न ही बच्चों के लिए कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था की गई। प्रशासनिक फाइलों में निर्णय दर्ज हैं, मगर जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।
Dausa School Negligence: 4.5 करोड़ मंजूर, फिर भी निर्माण शून्य
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार ने स्कूल भवन निर्माण के लिए 4.5 करोड़ रुपये स्वीकृत किए, लेकिन अब तक न जमीन उपलब्ध करवाई गई और न ही निर्माण कार्य शुरू हुआ। यह प्रशासनिक लापरवाही बच्चों के भविष्य पर सीधा असर डाल रही है।
रजिस्टर में शिक्षक उपस्थित, कक्षाएं खाली
निरीक्षण के दौरान सामने आया कि रजिस्टर में शिक्षक उपस्थित दर्ज थे, लेकिन कक्षाओं में शिक्षक मौजूद नहीं मिले। यानी कागजों में सब ठीक, हकीकत में हालात बदतर।
ग्रामीणों की मजबूरी और नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में उन्हें बच्चों को निजी स्कूलों में भेजना पड़ रहा है, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। उनका आरोप है कि अधिकारियों की मिलीभगत से स्कूल को कागजों में जर्जर दिखाया गया, लेकिन बच्चों के भविष्य की कोई चिंता नहीं की गई।
नामांकन घटा, गांव खाली होते जा रहे
इस प्रशासनिक लापरवाही का सीधा असर नामांकन पर पड़ा है। सरकारी स्कूल में बच्चों की संख्या लगातार घट रही है, जिससे गांवों का शैक्षिक ढांचा कमजोर हो रहा है।
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