दिल्ली: मुगलों की परपोते की विधवा ने दिल्ली के लाल किले पर दावा ठोका। उनका कहना है कि यह संपत्ति उनके पुर्खों की है, जिस पर हमारा अधिकार होना चाहिए। लेकिन अंग्रेजों ने उनके पुर्खों से यह संपत्ति छीन ली थी अब भारत सरकार का भी अवैध कब्जा है। कोर्ट ने मुगलों के परपोते की विधवा की याचिका को खारिज कर दिया। फैसले पर कोर्ट ने कहा कि याचिका ढाई साल से अधिक देरी के बाद दायर की है, जिसे माफ नहीं किया जा सकता। वहीं दावा करने वाली बेगम ने कहा कि अपनी खराब स्वास्थ्य और अपनी बेटी के निधन के कारण अपील दायर नहीं कर सकीं।
बहादुर शाह जफर की परपोते की विधवा ने ठोका दावा
मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर.द्वितीय के परपोते की विधवा ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक दायर दाखिल की है। उन्होंने वैध उत्तराधिकारी होने के नाते खुद को दिल्ली के लाल किले का स्वामित्व प्रदान करने का अनुरोध किया था। हालांकि दिल्ली होई कोर्ट ने उनकी इस याचिका को शुक्रवार को खारिज कर दिया। बता दें कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विभु बाखरू और न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने होई कोर्ट के एकल न्यायाधीश के दिसंबर 2021 के फैसले के खिलाफ सुल्ताना बेगम की अपील को खारिज कर दिया।
यह विरासत उनके पूर्वज बहादुर शाह जफर-द्वितीय से मिली
याचिका में दावा किया गया है कि बेगम लाल किले की मालकिन हैंए क्योंकि उन्हें यह विरासत उनके पूर्वज बहादुर शाह जफर.द्वितीय से मिली है। इसमें कहा गया है कि बहादुर शाह जफर.द्वितीय का 11 नवंबर 1862 को 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था और भारत सरकार का ;उनकीद्ध संपत्ति पर अवैध कब्जा है। याचिका में केंद्र सरकार को यह निर्देश देने का अनुरोध किया गया है कि वह लाल किले का कब्जा याचिकाकर्ता को सौंप दे या फिर पर्याप्त मुआवजा दे। इसमें वर्ष 1857 से लेकर अब तक लाल किले पर सरकार के कथित तौर पर अवैध कब्जे के लिए भी मुआवजे की मांग की गई थी।





