BY: Yoganand Shrivastva
ग्वालियर: स्पेशल कोर्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) ने ग्वालियर विकास प्राधिकरण (GDA) के अधिकारियों को जमीन आवंटन में कथित 25 करोड़ रुपए के घोटाले के मामले में क्लीन चिट देते हुए ईओडब्ल्यू की खात्मा रिपोर्ट को मंजूरी दे दी। कोर्ट ने कहा कि यह मामला शुरू से ही अपूर्ण तथ्यों और बिना ठोस प्रमाण के आधारित था।
जांच में शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया। शिकायत में सर्वे नंबर, वास्तविक बाजार मूल्य या कथित नुकसान का प्रमाण नहीं था। ईओडब्ल्यू ने 6 साल तक मामले की जांच की, लेकिन FIR में दर्ज आरोपों को साबित नहीं कर पाया।
जांच में यह भी सामने आया कि जिस जमीन का स्थान मुख्य सड़क के पास बताया गया था, वह वास्तव में सड़क से 35 मीटर अंदर थी और बीच में सरकारी भूमि और अन्य प्लॉट मौजूद थे। उस समय आवासीय भूमि की दर 2,200 रुपए प्रति वर्गमीटर और व्यावसायिक भूमि की दर 3,000 रुपए प्रति वर्गमीटर थी, जबकि शिकायत में करोड़ों का नुकसान दर्शाया गया था।
अधिकारियों के खिलाफ कोई मिलीभगत या दुरुपयोग साबित नहीं हुआ। सर्कल रेट, भूमि आवंटन समिति का रिकॉर्ड और अन्य विभागों की जांच रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ कि आवंटन नियमों के अनुरूप किया गया। कोर्ट ने कहा कि न तो भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएँ लागू होती हैं, न ही IPC की धारा 409, 420 या 120-बी की साजिश सिद्ध होती है।
कोर्ट ने सभी आरोपियों को क्लीन चिट देते हुए मामला समाप्त कर दिया।
अभियुक्त अधिकारियों की सूची:
- एलएन अग्रवाल – तत्कालीन GDA सीईओ व संयुक्त कलेक्टर, इंदौर
- रूपेश उपाध्याय – तत्कालीन संपदा अधिकारी व एसडीएम सबलगढ़
- यूएस मिश्रा – अधीक्षण यंत्री
- बृजभूषण मिश्रा – कार्यालय अधीक्षक
- कुशुम पांडे – सहायक ग्रेड-3
- बीके शर्मा – तत्कालीन संयुक्त संचालक
- मनोज श्रीवास्तव – डायरेक्टर, एसोटेक कंस्ट्रक्शन कंपनी





