Report; Imran Hussain
Kuno National Park Cheetah Death मध्य प्रदेश के श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से वन्यजीव प्रेमियों को विचलित करने वाली एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। कूनो में चीतों की मौतों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार को कूनो में रह रही 27 महीने की भारतीय मूल की मादा चीता ‘KGP11’ की इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। इस ताजा घटना ने एक बार फिर केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘चीता परियोजना’ की सुरक्षा व्यवस्था, ग्राउंड ट्रैकिंग और मॉनिटरिंग सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
Kuno National Park Cheetah Death पहाड़गढ़ के जंगलों में घायल मिली थी मादा चीता, 5 दिनों तक चला इलाज
कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन द्वारा जारी आधिकारिक प्रेस नोट के अनुसार, 1 जून को निगरानी टीम को सूचना मिली थी कि मादा चीता KGP11 कूनो की सीमा से बाहर मुरैना जिले के पहाड़गढ़ वन क्षेत्र के पास बेहद गंभीर और घायल अवस्था में पड़ी है। वन विभाग की रेस्क्यू टीम ने तत्परता दिखाते हुए उसे वहां से सुरक्षित निकाला और पालपुर स्थित अत्याधुनिक पशु चिकित्सा केंद्र में भर्ती कराया। यहां वन्यजीव डॉक्टरों की विशेष टीम ने करीब चार से पांच दिनों तक उसे बचाने के लिए सघन उपचार (Treatment) दिया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद शनिवार शाम को उसने दम तोड़ दिया।

Kuno National Park Cheetah Death कूनो में अब बचे 49 चीते; मौत की असली वजह का इंतजार
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मादा चीता के शरीर पर चोट के निशान थे या वह किसी अन्य अंदरूनी बीमारी से ग्रसित थी, इसका आधिकारिक तौर पर खुलासा पूरी पोस्टमार्टम (Post-Mortem) रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा। चीता परियोजना के ताजा और आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो KGP11 की मौत के बाद अब कूनो नेशनल पार्क में कुल चीतों की संख्या घटकर 49 रह गई है। इन 49 चीतों में से 32 चीते ऐसे हैं जो भारतीय मूल के हैं (यानी जिनका जन्म भारत की धरती पर हुआ है)। वहीं, अगर पूरे भारत की बात करें तो देश में कुल चीतों की आबादी अब महज 52 रह गई है।
Kuno National Park Cheetah Death विशेषज्ञ और वन्यजीव प्रेमी चिंतित, दावों पर उठे सवाल
गौरतलब है कि कूनो नेशनल पार्क में नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से लाए गए चीतों और भारत में जन्मे उनके शावकों की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई वयस्क चीते और शावक अपनी जान गंवा चुके हैं। हर बार किसी चीते की मौत के बाद प्रशासन द्वारा ट्रैकिंग व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ करने, सैटेलाइट कॉलर आईडी को दुरुस्त करने और चौबीसों घंटे निगरानी के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर लगातार हो रही ये मौतें वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंताओं को गहरा कर रही हैं।
Kuno National Park Cheetah Death क्या प्रभावी ट्रैकिंग में हो रही है चूक?
स्थानीय लोगों और वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि कूनो से निकलकर जब चीते मुरैना या आसपास के अन्य जिलों के खुले जंगलों में चले जाते हैं, तो उनकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग (Effective Monitoring) कमजोर पड़ जाती है। यदि इन चीतों की लगातार और प्रभावी ढंग से सैटेलाइट व ग्राउंड टीम के जरिए निगरानी की जाए, तो समय रहते उनके घायल होने या बीमार होने का पता लगाया जा सकता है और उन्हें सही समय पर मेडिकल असिस्टेंस देकर बचाया जा सकता है। मादा चीता KGP11 की असमय मौत ने एक बार फिर कूनो प्रबंधन को आत्ममंथन करने पर मजबूर कर दिया है।





