Isa Ahmad
चित्रकूट: भगवान श्रीराम की तपोभूमि
भगवान श्रीराम की तपोभूमि चित्रकूट के प्रमुख संतों ने देशवासियों से दीपावली पर्व पर मिट्टी के दीए और अन्य स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करने की अपील की है। उनका कहना है कि ऐसा करने से न केवल देश के गरीबों के घर खुशियों से रोशन होंगे, बल्कि भारत सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र भी बनेगा।
सुप्रसिद्ध संत दिगम्बर अखाड़ा के महंत दिव्य जीवन दास महाराज ने बताया कि चित्रकूट आदिकाल से ऋषि-मुनियों की साधना स्थली रही है। भगवान श्रीराम ने वनवास काल का लगभग साढ़े 11 वर्षों का समय यहीं व्यतीत किया। इसी स्थान पर उन्होंने पृथ्वी को राक्षसों के आतंक से मुक्त करने का प्रण लिया।
स्वदेशी दीपक से देशवासियों को संदेश
कामदगिरि प्रमुख द्वार मंदिर के महंत डॉ. मदन गोपाल दास महाराज ने कहा कि लंका विजय के बाद अयोध्या लौटते समय प्रभु श्रीराम चित्रकूट में रुके थे। तब साधु-संत और कोल-भील आदिवासियों ने दीप जलाकर उनका स्वागत किया था। यही सही मायने में दीपावली का आरंभ चित्रकूट से माना जाता है।
संतों ने देशवासियों से आग्रह किया कि इस दीपावली पर मिट्टी के दीए और अन्य स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करें। इससे कुम्हार और अन्य गरीब परिवारों के जीवन में खुशियाँ आएंगी और देश को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान मिलेगा। कामतानाथ मंदिर के प्रधान पुजारी भरत शरण दास महाराज ने भी इस संदेश को दोहराते हुए सभी से स्वदेशी वस्तुओं के प्रयोग की अपील की।





