भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) ने 7 अगस्त को एक बड़ा फैसला लेते हुए 11 पहलवानों को सस्पेंड कर दिया है। इन रेसलरों पर आरोप है कि इन्होंने प्रतियोगिताओं में भाग लेने के लिए फर्जी जन्म प्रमाणपत्र जमा किए थे।
यह निर्णय 100 से अधिक बर्थ सर्टिफिकेट्स की गहन जांच के बाद लिया गया।
क्यों उठाया गया यह कदम?
बीते कुछ समय से भारतीय कुश्ती में कई पहलवानों की उम्र को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शिकायतों के आधार पर WFI ने दिल्ली नगर निगम (MCD) से जन्म प्रमाणपत्रों की सत्यता की जांच करवाई।
MCD ने कुल 110 प्रमाणपत्रों की जांच की, जिनमें से 11 सर्टिफिकेट फर्जी पाए गए।
फर्जीवाड़ा कैसे हुआ?
- कई रेसलर ऐसे थे जो हरियाणा के निवासी थे, लेकिन उन्होंने दिल्ली के नाम पर सर्टिफिकेट हासिल किए।
- इन सर्टिफिकेट्स को Photoshop और अन्य तरीकों से एडिट कर MCD की ओर से जारी दिखाया गया।
- जांच में पता चला कि कुछ प्रमाणपत्र तो बच्चों के 12 से 15 साल बाद बनवाए गए थे।
MCD ने किए नाम सार्वजनिक
एक रिपोर्ट के मुताबिक, MCD ने जिन 11 रेसलरों के फर्जी सर्टिफिकेट पाए हैं, उनके नाम भी सार्वजनिक किए हैं:
- सक्षम
- मनुज
- कविता
- अंशू
- आरुष राणा
- शुभम
- गौतम
- जगरूप धनकड़
- नकुल
- दुष्यंत
- सिद्धार्थ बालियान
इन सभी पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रतियोगिताओं में भाग लेने का आरोप है।
क्या बोले अधिकारी?
MCD के अधिकारियों का कहना है कि:
“हमारी ओर से कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। जिन 95 पंजीकरणों की बात की जा रही है, वो विलंबित जरूर थे लेकिन वैध प्रक्रिया से किए गए थे।”
अब आगे क्या?
WFI अब इस मामले में और भी सख्ती बरतने के मूड में है। यह कार्रवाई एक कड़ा संदेश देती है कि:
- फर्जी दस्तावेजों से प्रतियोगिताओं में भाग लेना अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
- भविष्य में सभी खिलाड़ियों के दस्तावेजों का सख्ती से सत्यापन किया जाएगा।
WFI की यह कार्रवाई सिर्फ 11 रेसलरों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सिस्टम क्लीनिंग मूवमेंट की शुरुआत है। यदि खेल को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है, तो इस तरह की सख्त कार्रवाइयों की जरूरत है।





