BY: MOHIT JAIN
वक्फ (संशोधन) कानून 2025 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट आज अहम फैसला सुनाएगा। कोर्ट ने इस पर सुनवाई पूरी करने के बाद 22 मई को आदेश सुरक्षित रखा था। अब इस बहुचर्चित कानून पर सभी की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि यह फैसला देशभर की वक्फ संपत्तियों और उनके प्रबंधन को प्रभावित करेगा।
क्यों हुआ विवाद?
याचिकाकर्ताओं ने इस कानून को मुस्लिम समुदाय के अधिकारों के खिलाफ बताया और इस पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की। वहीं, केंद्र सरकार ने अदालत में दावा किया कि:
- वक्फ एक धार्मिक अवधारणा है, लेकिन यह इस्लाम का “अनिवार्य हिस्सा” नहीं है।
- इसे धर्म की बजाय परोपकारी दान के रूप में देखा जा सकता है।
- यह संविधान के तहत मौलिक अधिकार नहीं है, इसलिए संसद के पास इसे बदलने का अधिकार है।
कोर्ट में क्या हुई बहस?
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई ने सुनवाई के दौरान कहा था कि धार्मिक दान केवल इस्लाम तक सीमित नहीं है। हिंदू धर्म में ‘मोक्ष’ और ईसाई धर्म में ‘स्वर्ग’ जैसी अवधारणाएं भी दान से जुड़ी हैं।
याचिकाकर्ता कौन-कौन हैं?
इस मामले में कुल 5 प्रमुख याचिकाएं दाखिल हुईं, जिनमें शामिल हैं:
- AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी
- कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद
- AAP विधायक अमानतुल्लाह खान
- एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (APCR)
- जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी
कानून का सफर: संसद से सुप्रीम कोर्ट तक
- 5 अप्रैल 2025: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वक्फ (संशोधन) बिल पर हस्ताक्षर कर इसे कानून बनाया।
- लोकसभा में यह बिल 288 के समर्थन और 232 विरोध में पारित हुआ।
- कानून लागू होते ही देशभर में कई याचिकाएं दाखिल हुईं।
3 दिन की सुनवाई: तर्क और बहस
20 मई:
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को कहा कि अंतरिम राहत पाने के लिए मजबूत और स्पष्ट दलीलें दें।
21 मई:
केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वक्फ बाय यूजर कोई मौलिक अधिकार नहीं, बल्कि यह 1954 में बनाई गई नीति थी, जिसे वापस लिया जा सकता है।
22 मई:
कपिल सिब्बल ने आरोप लगाया कि सरकार वक्फ संपत्तियों को गैर-न्यायिक प्रक्रिया से हथियाना चाहती है।
क्यों है यह मामला अहम?
भारत में वक्फ बोर्ड देश की सबसे बड़ी जमीन मालिक संस्थाओं में से एक है। 2013 के बाद से वक्फ संपत्तियों में 20 लाख एकड़ का इजाफा हुआ है, जिससे निजी और सरकारी जमीनों को लेकर विवाद बढ़े हैं। यह फैसला इस पूरे प्रबंधन को नई दिशा दे सकता है।





