Report: Ram yadav
Vidisha : आज के दौर में जहाँ शादियों में महंगी लग्जरी कारों और तामझाम का बोलबाला है, वहीं विदिशा जिले के सिरोंज में एक दूल्हे ने अपनी बारात को यादगार बनाने के लिए ‘पुरानी संस्कृति’ का रास्ता चुना। सिरोंज के गल्ला मंडी रोड पर जब बैलगाड़ियों का काफिला निकला, तो हर कोई ठिठक कर इस अनोखे और मनमोहक नजारे को देखने लगा।
घोड़ी पर दूल्हे राजा और पीछे बैलगाड़ियों का कारवां
Vidisha इस अनोखी बारात का नजारा बेहद दिलचस्प था। आगे-आगे दूल्हे राजा पारंपरिक वेशभूषा में घोड़ी पर सवार होकर चल रहे थे, तो उनके ठीक पीछे एक-दो नहीं बल्कि 10 से 12 बैलगाड़ियाँ कतारबद्ध होकर चल रही थीं। इन बैलगाड़ियों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जिन पर बाराती बड़े उत्साह के साथ बैठे हुए थे। रास्ते भर लोग इस पारंपरिक बारात का वीडियो बनाते और दूल्हे की इस पहल की सराहना करते नजर आए।

पुरानी रीति-रिवाजों की यादें हुईं ताजा
Vidisha सिरोंज के बुजुर्गों ने इस नजारे को देखकर पुराने दिनों को याद किया। ग्रामीणों का कहना है कि दशकों पहले जब गाड़ियाँ और आधुनिक साधन नहीं थे, तब बैलगाड़ी ही बारात का मुख्य आधार होती थी। बैलगाड़ी से बारात ले जाने का अपना एक अलग आनंद और सादगी थी। लंबे समय बाद इस परंपरा को दोबारा जीवंत होते देख लोग भावुक और उत्साहित नजर आए।
सादगी और संस्कृति का अनूठा संदेश
Vidisha इस अनोखी बारात के पीछे का उद्देश्य नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और प्राचीन रीति-रिवाजों से रूबरू कराना है। बारातियों का कहना था कि कारों में वह आनंद नहीं आता जो खुली बैलगाड़ी में ढोल-धमाकों के साथ आता है। यह बारात न केवल चर्चा का विषय बनी हुई है, बल्कि सोशल मीडिया पर भी “प्राचीन परंपरा की वापसी” के रूप में तेजी से वायरल हो रही है।





