US Israel VS Iran War: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी संघर्ष अब तेरहवें दिन में पहुंच गया है। दोनों पक्षों की ओर से लगातार मिसाइल, बम और भारी हथियारों से हमले किए जा रहे हैं। हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं और युद्ध थमता हुआ नजर नहीं आ रहा। इसी बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में इस संघर्ष को लेकर बड़ा बयान दिया है।
US Israel VS Iran War: “चाहें तो एक घंटे में ईरान को खत्म कर सकते हैं” – ट्रंप
व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अगर अमेरिका चाहे तो ईरान को बहुत कम समय में पूरी तरह तबाह कर सकता है। उनके मुताबिक अमेरिकी सेना इतनी ताकतवर है कि वह एक घंटे के भीतर ईरान को ऐसी स्थिति में पहुंचा सकती है जहां से वह दोबारा उठ न सके। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल युद्ध को लेकर अंतिम फैसला परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
US Israel VS Iran War: दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना होने का दावा
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे बड़ी और ताकतवर सैन्य शक्ति है और इसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता। जब उनसे यह सवाल किया गया कि अगर मोजतबा खामेनेई ईरान के सुप्रीम लीडर बने रहते हैं तो क्या अमेरिका युद्ध में जीत की घोषणा करेगा, तो उन्होंने इस पर कोई सीधा जवाब देने से इनकार कर दिया।
US Israel VS Iran War: खामेनेई के बाद बेटे मोजतबा बने नए सुप्रीम लीडर
बताया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को देश का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त किया है। इस फैसले के बाद क्षेत्रीय राजनीति और भी संवेदनशील हो गई है।
US Israel VS Iran War: होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी चर्चा
तेल कंपनियों के प्रमुखों द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खुला रखने की अपील के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि समुद्री मार्ग का इस्तेमाल जारी रहना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के कई माइन बिछाने वाले जहाज नष्ट कर दिए गए हैं, जबकि ईरान की अधिकांश नौसेना समुद्र की गहराई में चली गई है।
US Israel VS Iran War: “ईरान पर इतिहास का सबसे बड़ा प्रहार”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान पर उसके इतिहास के सबसे कड़े सैन्य हमलों में से एक किया है, लेकिन अभी अभियान पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। उनके अनुसार यह कार्रवाई कुछ खतरनाक तत्वों को रोकने के लिए जरूरी थी। ट्रंप ने आरोप लगाया कि ईरान लंबे समय से अमेरिकी नागरिकों को नुकसान पहुंचाने और पूरे मध्य पूर्व में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा था, साथ ही इजरायल के अस्तित्व को भी खतरा पैदा कर रहा था।
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