यह लेख आपको भारत में प्रस्तावित यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (UPS) के बारे में विस्तृत जानकारी देगा। केंद्र सरकार नॉर्वे और नीदरलैंड जैसे देशों की तर्ज पर एक ऐसी योजना लाने की तैयारी कर रही है, जो असंगठित क्षेत्र के कामगारों, गिग वर्कर्स, मजदूरों और गैर-वेतनभोगी लोगों के साथ-साथ वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए भी लाभकारी हो। इस लेख में हम आपको बताएंगे कि यह स्कीम क्या है, इसे लाने की जरूरत क्यों पड़ी, और यह मौजूदा योजनाओं से कैसे अलग होगी।

यूनिवर्सल पेंशन स्कीम क्या है?
यूनिवर्सल पेंशन स्कीम (UPS) एक ऐसी प्रस्तावित योजना है, जिसका उद्देश्य भारत के हर नागरिक को उनके जीवन के अंतिम चरण में आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है। यह स्कीम खास तौर पर उन लोगों के लिए तैयार की जा रही है जो असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जैसे दिहाड़ी मजदूर, गिग वर्कर्स, और छोटे किसान। इसके अलावा, यह वेतनभोगी कर्मचारियों को भी शामिल करने की संभावना रखती है। अभी सरकार इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार कर रही है, जिसका अंतिम स्वरूप आने वाले समय में सामने आएगा।
हालांकि, यह स्पष्ट कर दें कि यह योजना यूनिफाइड पेंशन स्कीम (Unified Pension Scheme) से अलग है, जो सरकारी कर्मचारियों के लिए 1 अप्रैल 2025 से लागू होने वाली है। यूनिवर्सल पेंशन स्कीम का फोकस व्यापक है और यह समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखकर बनाई जा रही है।
यूनिवर्सल पेंशन स्कीम की जरूरत क्यों?
भारत में पहले से ही कई पेंशन योजनाएं चल रही हैं, जैसे नेशनल पेंशन स्कीम (NPS), अटल पेंशन योजना (APY), प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYM), और प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना। फिर भी, सरकार को एक नई योजना लाने की जरूरत क्यों महसूस हुई? इसके पीछे कुछ ठोस कारण हैं:
1. असंगठित क्षेत्र की अनदेखी
भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में काम करता है। ये लोग अपने रोज़ाना के खर्च में ही अपनी कमाई खर्च कर देते हैं और भविष्य के लिए बचत नहीं कर पाते। नतीजतन, उनका बुढ़ापा आर्थिक तंगी में बीतता है। मौजूदा योजनाओं में उनकी भागीदारी कम रही है, जिसके कारण एक व्यापक योजना की जरूरत पड़ी।
2. मौजूदा योजनाओं की कमियां
- एनपीएस: यह योजना बाजार आधारित रिटर्न देती है, लेकिन इसकी प्रक्रिया जटिल होने के कारण गैर-वेतनभोगी लोग इसमें रुचि नहीं लेते।
- अटल पेंशन योजना: इसमें अधिकतम 5000 रुपये मासिक पेंशन की सीमा है, जो आज के महंगाई के दौर में नाकाफी है।
- PM-SYM और किसान मानधन योजना: ये योजनाएं खास वर्गों तक सीमित हैं और इनमें पात्रता की शर्तें सख्त हैं।
इन कमियों को दूर करने के लिए सरकार यूनिवर्सल पेंशन स्कीम पर काम कर रही है, जो आसान, समावेशी, और बेहतर रिटर्न देने वाली हो।
मौजूदा पेंशन योजनाएं और उनकी विशेषताएं
आइए, मौजूदा योजनाओं पर एक नजर डालें ताकि यह समझ सकें कि नई स्कीम इनसे कैसे अलग होगी:
नेशनल पेंशन स्कीम (NPS)
- सभी के लिए खुली योजना।
- बाजार आधारित रिटर्न।
- सरकारी कर्मचारियों के लिए बेसिक सैलरी और DA का 10% योगदान, सरकार 14% देती है।
- जटिल प्रक्रिया के कारण आम लोग कम जुड़ते हैं।
अटल पेंशन योजना (APY)
- 18-40 साल के लोग 210 से 1454 रुपये मासिक जमा कर सकते हैं।
- 60 साल की उम्र के बाद 1000 से 5000 रुपये तक पेंशन।
- सीमित पेंशन राशि इसकी कमजोरी।
प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना (PM-SYM)
- असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए।
- 60 साल के बाद 3000 रुपये मासिक पेंशन।
- 55 से 2000 रुपये मासिक योगदान।
- इनकम टैक्स देने वाले और EPF/ESIC/NPS सदस्य पात्र नहीं।
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना
- छोटे और सीमांत किसानों के लिए।
- 60 साल के बाद 3000 रुपये मासिक पेंशन।
- 55 से 200 रुपये मासिक जमा।
- सरकार भी बराबर योगदान करती है।
यूनिवर्सल पेंशन स्कीम की संभावित खासियतें
हालांकि अभी योजना का अंतिम मसौदा तैयार नहीं हुआ है, लेकिन कुछ संभावनाएं सामने आ रही हैं:
- समावेशिता: यह योजना हर वर्ग को जोड़ेगी, चाहे वह संगठित हो या असंगठित क्षेत्र।
- आसान प्रक्रिया: एनपीएस की जटिलता को हटाकर इसे सरल बनाया जा सकता है।
- बेहतर पेंशन राशि: अटल पेंशन योजना से ज्यादा और आज के दौर के हिसाब से पर्याप्त पेंशन।
- योजनाओं का विलय: कुछ मौजूदा योजनाओं को इसमें मिलाया जा सकता है।
यूनिवर्सल और यूनिफाइड पेंशन स्कीम में अंतर
लोगों में अक्सर यूनिवर्सल पेंशन स्कीम और यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) को लेकर भ्रम होता है। आइए इसे समझें:
- यूनिफाइड पेंशन स्कीम: यह सरकारी कर्मचारियों के लिए है, जो 1 अप्रैल 2025 से लागू होगी। इसमें 25 साल की सेवा के बाद औसत मूल वेतन का 50% पेंशन मिलेगा।
- यूनिवर्सल पेंशन स्कीम: यह सभी नागरिकों के लिए होगी, खासकर असंगठित क्षेत्र पर फोकस के साथ।
यूनिवर्सल पेंशन स्कीम भारत में सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम हो सकती है। यह न केवल असंगठित क्षेत्र के लोगों को उनके बुढ़ापे में सहारा देगी, बल्कि वेतनभोगी कर्मचारियों को भी बेहतर विकल्प दे सकती है। सरकार अभी इसके शुरुआती चरण में है, और इसका अंतिम स्वरूप आने पर ही पूरी तस्वीर साफ होगी। तब तक मौजूदा योजनाओं का लाभ उठाएं और अपने भविष्य को सुरक्षित करने की योजना बनाएं।





