Report by: Rakhi Verma
Uniform Civil Code: उत्तराखंड और गुजरात के बाद भाजपा शासित कई राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की मांग तेज हो गई है। अब मध्यप्रदेश भी इस दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी में है। गुजरात विधानसभा ने मार्च 2026 में UCC विधेयक को बहुमत से मंजूरी दी, जो राज्य के सभी निवासियों के लिए विवाह, तलाक, विरासत और संपत्ति जैसे मामलों में एक समान कानून लागू करेगा।
Uniform Civil Code: BJP का प्रमुख एजेंडा, राम मंदिर, अनुच्छेद 370 और UCC
भाजपा के प्रमुख मुद्दों में राम मंदिर और तीन तलाक के बाद UCC को पूरे देश में लागू करना शामिल है। पार्टी इसे राष्ट्रीय एकता, महिला सशक्तिकरण और समानता से जोड़कर देखती है। मध्यप्रदेश में फिलहाल ड्राफ्टिंग और अध्ययन की प्रक्रिया तेज हो रही है, और मानसून सत्र या उसके बाद विधानसभा में विधेयक पेश किए जाने की संभावना है।
Uniform Civil Code: UCC क्या है?
यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का अर्थ भारत में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने और संपत्ति के अधिकारों में एक समान कानून लागू करना है। यह धर्म, जाति या लिंग की परवाह किए बिना सभी पर समान रूप से लागू होगा। इसका उद्देश्य व्यक्तिगत धर्म आधारित कानूनों को बदलकर एक साझा कानूनी ढांचा बनाना है।
Uniform Civil Code: UCC के अहम बिंदु
- भारतीय संविधान का अनुच्छेद 44 राज्य को समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
- इसका प्रमुख उद्देश्य लैंगिक समानता को बढ़ावा देना और कानूनी प्रणाली को सरल व धर्मनिरपेक्ष बनाना है।
- गोवा में 1961 से एक समान नागरिक संहिता लागू है।
- उत्तराखंड भारत का पहला राज्य बन गया जिसने 2024-25 में राज्य-स्तरीय UCC अपनाया।
- उत्तराखंड के UCC में लिव-इन रिलेशनशिप को रजिस्टर करना अनिवार्य किया गया।
Uniform Civil Code: विरोध और चुनौती
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने UCC को लागू करने पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उनके प्रवक्ता कासिम रसूल इलियास ने कहा कि यह संविधान की मूल भावना के खिलाफ है और राज्यों को ऐसा कानून लागू करने का अधिकार नहीं होना चाहिए। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और पहचान पर दखल बताया।
Uniform Civil Code: UCC के भविष्य की दिशा
UCC विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में सभी धर्मों के लिए समान कानून लाने का प्रयास है। हालांकि इसके विरोध और राजनीतिक विवाद भी सामने आए हैं। गुजरात और उत्तराखंड के बाद मध्यप्रदेश में इसे लागू करने की तैयारी है, और धीरे-धीरे इसका दायरा बढ़ता दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में इसका प्रभाव और व्यापक चर्चा का विषय बनेगा।





