अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की आज व्हाइट हाउस में आमने-सामने होंगे। यह मुलाकात रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की दिशा में बेहद अहम मानी जा रही है।
ट्रम्प ने कुछ दिन पहले ही रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलास्का में तीन घंटे लंबी बैठक की थी, लेकिन वह बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। अब सबकी नजरें ट्रम्प-जेलेंस्की मीटिंग पर हैं।
कौन-कौन होंगे शामिल?
इस बैठक में सिर्फ ट्रम्प और जेलेंस्की ही नहीं, बल्कि कई यूरोपीय नेता भी मौजूद रहेंगे, जिनमें शामिल हैं:
- ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर
- जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्त्ज
- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों
- इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी
- नाटो महासचिव मार्क रूटे
ट्रम्प और जेलेंस्की की तीसरी मुलाकात
- पिछले 7 महीनों में यह दोनों नेताओं की तीसरी मुलाकात होगी।
- पिछली बार वॉशिंगटन में हुई बातचीत के दौरान दोनों के बीच तीखी बहस हुई थी।
- ट्रम्प ने उस समय आरोप लगाया था कि जेलेंस्की अमेरिकी मदद को हल्के में ले रहे हैं।
- इसके बाद दोनों 26 अप्रैल को रोम में पोप फ्रांसिस के अंतिम संस्कार में अनौपचारिक रूप से मिले थे।
जेलेंस्की का फोकस किन मुद्दों पर होगा?
जेलेंस्की इस बैठक में तीन मुख्य बिंदुओं पर जोर देंगे:
- युद्धविराम और आम नागरिकों की हत्याएं रोकना
- रूस पर और कड़े प्रतिबंध लगाना
- सीजफायर के बाद यूक्रेन की सुरक्षा गारंटी सुनिश्चित करना
साथ ही जेलेंस्की इस बात पर भी जोर देंगे कि किसी भी समझौते में यूक्रेन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता से समझौता न हो।
रूस की शर्तें क्या हैं?
- रूस वर्तमान में यूक्रेन के करीब 20% हिस्से पर कब्जा किए बैठा है।
- पुतिन का साफ कहना है कि जब तक यूक्रेन इन क्षेत्रों पर अपना दावा नहीं छोड़ता, शांति वार्ता आगे नहीं बढ़ सकती।
- साथ ही रूस चाहता है कि यूक्रेन नाटो में शामिल न हो।
- पुतिन यूक्रेन को पश्चिमी सीमा पर “बफर जोन” के रूप में देखना चाहते हैं।
जमीन अदला-बदली पर विवाद
पुतिन ने हाल ही में ट्रम्प के सामने प्रस्ताव रखा कि डोनेट्स्क के बदले रूस दक्षिणी यूक्रेन के खेरसॉन और जापोरिज्जिया इलाकों में अपनी स्थिति स्थिर कर सकता है।
हालांकि यह प्रस्ताव विवादास्पद है, क्योंकि यूक्रेन डोनेट्स्क के कुछ अहम हिस्सों पर अभी भी नियंत्रण रखता है, जो उसकी सुरक्षा और आर्थिक रणनीति के लिए बेहद जरूरी हैं।
यूरोपीय देशों का रुख
जर्मनी, ब्रिटेन और फ्रांस ने साफ कर दिया है कि वे यूक्रेन की संप्रभुता के खिलाफ किसी भी समझौते का समर्थन नहीं करेंगे।
उनका मानना है कि सीजफायर से पहले यूक्रेन को सुरक्षा गारंटी मिलना जरूरी है।
हालिया ट्रम्प-पुतिन मीटिंग से क्या निकला?
- सीजफायर पर सहमति नहीं बनी – तीन घंटे की चर्चा बेनतीजा रही।
- त्रिपक्षीय बैठक का प्रस्ताव – ट्रम्प ने पुतिन और जेलेंस्की के साथ साझा बातचीत की बात कही।
- कैदियों की अदला-बदली पर संभावना – दोनों पक्षों ने इस पर आंशिक सहमति जताई।
- नए प्रतिबंध टले – ट्रम्प ने रूस पर फिलहाल नए प्रतिबंध लगाने से इनकार किया।
अमेरिका-यूक्रेन मिनरल डील
30 अप्रैल को अमेरिका और यूक्रेन ने एक मिनरल डील पर साइन किए।
- अमेरिका को यूक्रेन के खनिज प्रोजेक्ट्स में खास पहुंच मिली।
- बदले में अमेरिका यूक्रेन के पुनर्निर्माण में निवेश करेगा।
- इसके लिए एक जॉइंट इन्वेस्टमेंट फंड बनाया जाएगा।
ट्रम्प और जेलेंस्की की यह बैठक सिर्फ दो देशों की नहीं, बल्कि वैश्विक सुरक्षा और शांति के भविष्य से जुड़ी है।
जहां एक ओर ट्रम्प युद्ध रोकने के लिए “जमीन अदला-बदली” का फार्मूला आगे बढ़ा रहे हैं, वहीं जेलेंस्की संप्रभुता और सुरक्षा गारंटी पर अडिग हैं।
अब देखना यह होगा कि इस अहम मुलाकात से क्या सच में युद्धविराम का कोई रास्ता निकलता है या फिर यह भी पिछली कोशिशों की तरह अधूरी रह जाएगी।





