BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली अमेरिका-ईरान शांति वार्ता के बेनतीजा खत्म होने के बाद दुनिया पर एक लंबे युद्ध का खतरा मंडराने लगा है। वार्ता के टूटने से नाराज अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्वदेश लौट चुके हैं। इस बीच, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन खुफिया रिपोर्टों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, जिनमें दावा किया गया है कि चीन अब ईरान को उन्नत हथियार और हवाई रक्षा प्रणालियाँ (Air Defense Systems) सप्लाई करने जा रहा है।

New Delhi चीन को चेतावनी: ‘मुश्किलें बढ़ने वाली हैं’
व्हाइट हाउस के बाहर मीडिया से चर्चा करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन को सीधे शब्दों में चेतावनी दी। खुफिया सूत्रों के हवाले से आई खबरों में कहा गया है कि बीजिंग अगले कुछ हफ्तों में तेहरान को नए एयर डिफेंस सिस्टम भेजने की तैयारी में है। इस पर ट्रंप ने कहा, “अगर चीन ऐसा करता है, तो उन्हें बड़ी मुश्किलें होंगी और यह उनके लिए बहुत बुरा साबित होगा।” ट्रंप के इस बयान ने संकेत दे दिए हैं कि अमेरिका अब चीन पर नए आर्थिक या कूटनीतिक प्रतिबंध लगाने पर विचार कर सकता है।

New Delhi ईरान बनेगा ‘अगला यूक्रेन’? अमेरिका को फंसाने की साजिश
विशेषज्ञों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चीन की यह चाल अमेरिका को एक लंबे और थका देने वाले युद्ध में फंसाने की रणनीति हो सकती है। जिस तरह अमेरिका ने रूस के खिलाफ यूक्रेन को हथियारों की आपूर्ति कर युद्ध को 4 साल से अधिक समय तक खींच दिया, ठीक वही रणनीति चीन अब ईरान में अपना रहा है। यदि ईरान को चीनी हथियारों की सुरक्षा मिल जाती है, तो अमेरिका और ईरान के बीच का संघर्ष वर्षों तक चल सकता है, जो पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिरता के लिए एक बुरा सपना साबित होगा।
New Delhi क्यों फेल हुई इस्लामाबाद वार्ता? दोनों पक्षों की अपनी-अपनी जिद
New Delhi मैराथन बैठक के बावजूद कोई समझौता न हो पाने के पीछे दोनों देशों की कड़ी शर्तें मुख्य कारण रहीं:

- ईरान की मांग: तेहरान चाहता था कि अमेरिका उसकी जब्त की गई संपत्तियों को तुरंत रिलीज करे और लेबनान को भी युद्ध विराम समझौते का हिस्सा बनाया जाए।
- अमेरिका की शर्त: वाशिंगटन ने मांग रखी कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह बंद करे।
- अड़ियल रुख: ईरान ने स्पष्ट कर दिया कि वह यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) जारी रखेगा और परमाणु हथियार बनाने का लक्ष्य नहीं छोड़ेगा।
इन मतभेदों के चलते वार्ता टूट गई और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भड़क कर इस्लामाबाद से अमेरिका के लिए रवाना हो गए। अब पूरी दुनिया की नजरें चीन और अमेरिका के अगले कदम पर टिकी हैं।





