by: vijay nadnan
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भारत नीति को लेकर अमेरिका के भीतर ही कड़ी आलोचना हो रही है। डेमोक्रेटिक पार्टी के तीन वरिष्ठ सांसदों ने चेतावनी दी है कि ट्रंप की विदेश नीति से भारत जैसे अहम साझेदार देश रूस और चीन के करीब जा रहे हैं, जिससे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है। उनका कहना है कि ये कदम न केवल भारत-अमेरिका संबंधों को कमजोर कर रहे हैं, बल्कि वैश्विक मंच पर अमेरिका की साख को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
तीन बड़े डेमोक्रेट सांसदों का संयुक्त बयान
न्यूयॉर्क, वाशिंगटन और कनेक्टिकट से आने वाले तीन प्रभावशाली डेमोक्रेटिक सांसदों—ग्रेगरी डब्ल्यू. मीक्स (विदेश मामलों की समिति), एडम स्मिथ (सशस्त्र सेवा समिति) और जिम हिम्स (खुफिया समिति)—ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इसमें उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की नीतियां घरेलू और वैश्विक स्तर पर कमजोरी और लापरवाही दर्शाती हैं। उनके मुताबिक, भारत पर भारी टैरिफ लगाकर ट्रंप प्रशासन ने उसे रूस और चीन की ओर धकेलने का काम किया और इससे अमेरिका खुद भी नुकसान में रहा।

भारत-अमेरिका रिश्तों पर असर
सांसदों के अनुसार, भारत और अन्य देशों पर भारी शुल्क लगाने जैसी कार्रवाइयों ने दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचाया है। इस तरह की नीतियां भारत सहित कई देशों को रूस, चीन और यहां तक कि उत्तर कोरिया के करीब ला रही हैं। सांसदों ने इसे अमेरिका की मौजूदा और भविष्य की विदेश नीति के लिए गंभीर चेतावनी बताया।
पुतिन से नज़दीकी पर भी सवाल
डेमोक्रेट सांसदों ने ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई शिखर वार्ता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप ने शुरुआत से ही पुतिन को समर्थन दिया और उनके “अन्यायपूर्ण” कदमों को नज़रअंदाज किया। पुतिन के लिए रेड कार्पेट बिछाने से लेकर सहयोगी देशों पर टैरिफ लगाने तक, ट्रंप की ये नीतियां अमेरिका को मज़बूत करने के बजाय कमजोर कर रही हैं।
वैश्विक शांति पर प्रभाव
सांसदों का मानना है कि ट्रंप का रवैया रूस को और अधिक आक्रामक बनने का अवसर देता है, जिसका असर अंतरराष्ट्रीय स्थिरता और वैश्विक शांति पर पड़ सकता है। उनका कहना है कि इस तरह की विदेश नीति से अमेरिका की नेतृत्व क्षमता पर सवाल खड़े होते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने वाली शक्तियों को बल मिलता है।
ट्रंप की इन नीतियों ने भारत-अमेरिका रिश्तों में बढ़ाई खटास
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद भारत-अमेरिका संबंधों में कई उतार-चढ़ाव आए। उनकी कुछ नीतियां भारत के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुईं।
सबसे पहले, ट्रंप प्रशासन ने भारत पर भारी आयात शुल्क (टैरिफ) लगाया, जिससे व्यापारिक रिश्तों में तनाव बढ़ा। भारत को जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज़ (GSP) से बाहर करना भी एक बड़ा झटका था, जिसके कारण भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाज़ार में विशेष रियायतें नहीं मिल सकीं।
दूसरा, ट्रंप ने आव्रजन नीति (इमिग्रेशन पॉलिसी) सख़्त कर दी। एच-1बी वीज़ा के नियमों को कड़ा करने से भारतीय आईटी पेशेवरों और कंपनियों को भारी नुकसान हुआ। इससे अमेरिका में काम करने वाले भारतीय विशेषज्ञों के अवसर सीमित हो गए। तीसरा, उन्होंने भारत की सामरिक स्वायत्तता को ध्यान में रखे बिना रूस और ईरान जैसे देशों से भारत के संबंधों पर दबाव डाला। उदाहरण के तौर पर, ईरान से तेल खरीदने और रूस से एस-400 मिसाइल सिस्टम सौदे पर ट्रंप प्रशासन ने प्रतिबंधों की चेतावनी दी। चौथा, बहुपक्षीय मंचों पर ट्रंप का “अमेरिका फर्स्ट” रवैया सहयोगात्मक रुख़ के बजाय टकराव वाला रहा। इससे भारत सहित कई देशों को वैकल्पिक साझेदारियों की ओर देखना पड़ा। इन नीतियों से भारत-अमेरिका संबंधों में भरोसे की कमी आई और भारत को रणनीतिक रूप से रूस और चीन के करीब जाने की गुंजाइश मिली।





