Traditional Indian Sport: डिंडोरी के जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल, बरगांव द्वारा संचालित नर्मदांचल विद्यापीठ के विद्यार्थियों ने पारंपरिक भारतीय खेल और साधना विधा मलखंब के माध्यम से शारीरिक कौशल, मानसिक एकाग्रता और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत प्रदर्शन किया। यह आयोजन केवल खेल नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा, अनुशासन और आत्मबल की जीवंत अभिव्यक्ति बनकर सामने आया।
Traditional Indian Sport: मलखंब प्रदर्शन में दिखा कौशल और समर्पण
विद्यालय के विद्यार्थियों ने संतुलन, साहस, लय, शक्ति और समन्वय के विविध आयामों को कुशलता से प्रस्तुत किया। बालक-बालिकाओं ने विभिन्न मुद्राओं, आरोह-अवरोह और संयोजनात्मक अभ्यासों के माध्यम से दिखाया कि मलखंब केवल व्यायाम नहीं, बल्कि मन, शरीर और आत्मा के समग्र विकास की साधना है।

भारतीय परंपरा और अनुशासन का संगम
विद्यार्थियों ने मलखंब को खेल, योग, अनुशासन और सांस्कृतिक विरासत के रूप में प्रस्तुत किया। अभ्यास में आत्मविश्वास, धैर्य और निरंतर अभ्यास की झलक स्पष्ट रही, जिसने दर्शकों को यह सोचने पर मजबूर किया कि भारतीय पारंपरिक खेल आज भी युवाओं को सशक्त बनाने की शक्ति रखते हैं।
अतिथियों की प्रशंसा
कार्यक्रम में अखिल भारतीय सह-सेवा प्रमुख राजकुमार जी मटाले भाई साहब विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों के प्रदर्शन की मुक्तकंठ से प्रशंसा की और कहा कि मलखंब जैसी विधाएँ शरीर को स्वस्थ, मन को स्थिर और जीवन को अनुशासित बनाती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतिभा अवसर की प्रतीक्षा करती है, स्थान की नहीं।

कार्यक्रम में उपस्थित लोग
जनजाति कल्याण केंद्र महाकौशल, बरगांव के अध्यक्ष साहू जी, शिक्षकगण, अभिभावक और बड़ी संख्या में विद्यार्थी कार्यक्रम में उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और समर्पण की सराहना की और इसे क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी बताया।
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Traditional Indian Sport: शिक्षा और संस्कृति का संतुलन
विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि नर्मदांचल विद्यापीठ में शिक्षा के साथ-साथ खेल, योग और पारंपरिक भारतीय व्यायाम पद्धतियों को विशेष महत्व दिया जाता है। मलखंब जैसे खेल विद्यार्थियों में नेतृत्व, साहस, अनुशासन और सामूहिक चेतना का विकास करते हैं, जो उनके सर्वांगीण व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होते हैं।
कार्यक्रम का समापन उत्साह, तालियों और गर्वपूर्ण माहौल के साथ हुआ। यह आयोजन नर्मदांचल विद्यापीठ की उस दृष्टि को दर्शाता है, जिसमें आधुनिक शिक्षा और भारतीय परंपरा का संतुलित संगम स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।





