BY: Yoganand Shrivastva
तेलंगाना: महबूबनगर जिले में स्थित पिल्लालामर्री बरगद दुनिया के सबसे पुराने और विशाल बरगद के पेड़ों में से एक माना जाता है। यह पेड़ लगभग 800 साल पुराना है और अपने विशाल तनों और शाखाओं के कारण चार एकड़ क्षेत्र में फैल चुका है। इसकी छाया इतनी बड़ी है कि लगभग 1,000 लोग आराम से बैठ सकते हैं।
विशेष देखभाल के लिए सलाइन
इतनी पुरानी उम्र और विशालता के कारण पेड़ के मुख्य तने में दीमक लग गई थी, जिससे इसकी कुछ शाखाएं नष्ट हो गईं। प्रारंभिक तौर पर रासायनिक उपचार कारगर साबित नहीं हुआ। इसके बाद वन्य विभाग ने पेड़ को सलाइन (IV ड्रिप) के जरिए कीटनाशक दिया। पेड़ के विभिन्न हिस्सों में कई सलाइन की बोतलें लटकाई गईं, ताकि कीड़ों से बचाव किया जा सके और पेड़ की सेहत को बनाए रखा जा सके।
प्राकृतिक और ऐतिहासिक महत्व
पिल्लालामर्री का तना, शाखाएं और जड़ें इतने विकसित हैं कि पेड़ जंगल जैसा दिखता है। इसकी छाया लगभग 19,000 वर्ग गज (करीब 1.6 हेक्टेयर) में फैली हुई है। यह पेड़ न केवल अपनी विशालता बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण भी प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि हैदराबाद के निजाम गर्मियों में इसकी ठंडी छाया में पिकनिक मनाने आया करते थे।
नाम का रहस्य
‘पिल्लालामर्री’ का मतलब है “बच्चों का बरगद” – क्योंकि पेड़ के तने से उगने वाली जड़ें और नए तने पुराने पेड़ के बच्चे जैसे दिखाई देते हैं। लोककथाओं के अनुसार, इस पेड़ के नीचे प्रार्थना करने वाले दंपतियों को संतान सुख प्राप्त होता था।
पर्यटन और सांस्कृतिक स्थल
इस विशाल पेड़ के आसपास एक प्राचीन मंदिर, पुरातत्व संग्रहालय, हिरण उद्यान और छोटा चिड़ियाघर भी मौजूद है, जो इसे पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बनाता है।





