BY: Yoganand Shrivastava
इंदौर: जिला अदालत ने निलंबित न्यायाधीश वीरेंद्र सिंह रावत को जमानत प्रदान की है। यह मामला वर्ष 2021 का है, जब तत्कालीन न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी विजेंद्र सिंह रावत द्वारा IAS संतोष वर्मा को फर्जी मार्कशीट मामले में जमानत देने का मामला सामने आया था।
घटना की पृष्ठभूमि में एमजी रोड पुलिस द्वारा फर्जी न्यायिक आदेश तैयार करने के आरोप में IAS संतोष वर्मा के विरुद्ध गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें जेल भेजा गया। जिला एवं सत्र न्यायालय इंदौर और हाईकोर्ट की खंडपीठ ने उनकी जमानत याचिकाएं खारिज की थीं, जिसके बाद वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली।
2021 में हुई थी कार्रवाई
लसुड़िया थाने में दर्ज प्रकरण के मुताबिक, संतोष वर्मा पर अदालत के दो आदेशों की जाली प्रतियां तैयार कर उन्हें उपयोग में लेने का आरोप है। इस मामले में वे पहले से जमानत पर हैं। शिकायत के आधार पर उनके विरुद्ध 120-बी, 420, 467, 468 और 471 सहित कई धाराओं में केस दर्ज किया गया था।
विजेंद्र रावत को अग्रिम जमानत
शुक्रवार को सत्र न्यायाधीश प्रकाश कसेर ने एसीपी विनोद दीक्षित की जांच रिपोर्ट में आरोपी बनाए गए निलंबित एडीजे विजेंद्र रावत को अग्रिम जमानत का लाभ दिया। जिला लोक अभियोजक अभिजीत सिंह राठौर ने जानकारी दी कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाली शिकायत में ही विजेंद्र रावत को आरोपित किया गया था।
मोबाइल लोकेशन ने बढ़ाई शंका
पुलिस की जांच में यह तथ्य सामने आया था कि 5 और 6 अक्टूबर को जिस समय कथित फर्जी दस्तावेज तैयार हुए, उस दौरान IAS संतोष वर्मा और विजेंद्र रावत दोनों की मोबाइल लोकेशन जिला कोर्ट परिसर और रेजिडेंसी कोठी क्षेत्र में पाई गई थी। इसके अतिरिक्त, जिन कंप्यूटरों पर दस्तावेज टाइप किए गए थे उनकी हार्ड डिस्क पुलिस पहले ही जब्त कर चुकी है।इन आधारों पर पुलिस को रावत से विस्तृत पूछताछ की आवश्यकता बताई गई थी। हालांकि, अग्रिम जमानत मिल जाने के बाद अब जांच की गति पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है। पूरा मामला एक बार फिर न्यायिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।





