स्पेसएक्स (SpaceX) ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कंपनी ने अपने सबसे बड़े और शक्तिशाली रॉकेट स्टारशिप (Starship) का दसवां परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। इस दौरान पहली बार रॉकेट ने अंतरिक्ष में आठ डमी सैटेलाइट्स को तैनात किया।
स्टारशिप ने दक्षिण टेक्सस के स्टारबेस लॉन्च साइट से शाम साढ़े छह बजे उड़ान भरी और लगभग एक घंटे तक पृथ्वी की कक्षा में घूमने के बाद हिंद महासागर में सुरक्षित लैंडिंग की।
अंतरिक्ष अन्वेषण में बड़ी उपलब्धि
- यह रॉकेट दुनिया का सबसे बड़ा और शक्तिशाली रॉकेट माना जाता है।
- नासा और स्पेसएक्स इसे चांद और मंगल मिशनों के लिए इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं।
- नासा इस दशक के अंत तक चांद मिशन के लिए दो स्टारशिप रॉकेट तैयार कर रहा है।
- स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क का अंतिम लक्ष्य है – मंगल पर मानव मिशन भेजना।
सुपर हेवी बूस्टर की सफलता
परीक्षण के दौरान सुपर हेवी बूस्टर को भी सफलतापूर्वक अटलांटिक महासागर में उतारा गया। इसके लिए स्पेसएक्स ने विशेष ‘लैंडिंग-बर्न’ प्रक्रिया का इस्तेमाल किया।
रोचक बात यह रही कि जब रॉकेट पृथ्वी की कक्षा में था, तब उसने टेक्सस में दिन से रात और फिर रात से दिन का दृश्य दिखाया। अंततः रॉकेट ने हिंद महासागर में नियोजित लैंडिंग की और पूरी तरह सीधा पानी में उतरा।
असफलताओं के बाद सफलता
यह सफलता स्पेसएक्स के लिए बेहद खास है क्योंकि:
- जनवरी और मार्च 2025 में हुए परीक्षण लॉन्च के कुछ ही मिनटों बाद असफल हो गए थे।
- मई में नौवां परीक्षण भी विफल रहा, जब स्पेसक्रॉफ्ट संतुलन खोकर टूट गया।
- इसके बाद कंपनी ने सुपर हेवी बूस्टर को नए डिज़ाइन के साथ तैयार किया, जिसमें बड़े और मजबूत पंख जोड़े गए।
कंपनी ने हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इन बदलावों की जानकारी साझा की थी।
क्यों है यह परीक्षण खास?
- पहली बार स्टारशिप ने पेलोड को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में भेजा।
- यह उपलब्धि नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम और भविष्य के मंगल मिशनों के लिए अहम मानी जा रही है।
- इस सफलता से स्पेसएक्स की तकनीकी क्षमता और भी मजबूत हुई है।





