BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi केंद्र सरकार ने शनिवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए लद्दाख के प्रमुख सामाजिक और जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया है। पिछले साल सितंबर में लेह में हुई हिंसा के बाद वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था। लगभग 6 महीने (170 से अधिक दिन) जेल में बिताने के बाद, अब वांगचुक बिना किसी शर्त के बाहर आएंगे। इसे लद्दाख में जारी गतिरोध को खत्म करने और केंद्र व स्थानीय संगठनों के बीच बातचीत बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

New Delhi क्यों हुई थी वांगचुक की गिरफ्तारी?
सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 को लेह जिला मजिस्ट्रेट के आदेश पर हिरासत में लिया गया था।
- पृष्ठभूमि: लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा, संविधान की छठी अनुसूची में शामिल करने और स्थानीय नौकरियों व भूमि अधिकारों की सुरक्षा की मांग को लेकर 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसक प्रदर्शन हुए थे।
- आरोप: इस हिंसा में 4 लोगों की मौत हो गई थी, जिसके बाद सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वांगचुक पर कड़ा कानून (NSA) लगाया था।
New Delhi सरकार का रुख: “बातचीत के लिए बनाया जा रहा माहौल”
गृह मंत्रालय ने बयान जारी कर स्पष्ट किया कि यह फैसला लद्दाख में शांति और आपसी विश्वास का माहौल तैयार करने के लिए लिया गया है।

- सार्थक संवाद: मंत्रालय का कहना है कि सरकार लद्दाख के सभी पक्षों के साथ रचनात्मक बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है।
- सुरक्षा का वादा: केंद्र ने एक बार फिर दोहराया कि लद्दाख के सांस्कृतिक संरक्षण और विकास के लिए ‘सभी जरूरी सुरक्षा उपाय’ किए जाएंगे।
New Delhi लद्दाख की मांगों पर क्या होगा असर?
सोनम वांगचुक की रिहाई के बाद अब उम्मीद जताई जा रही है कि हाई पावर्ड कमिटी (HPC) की बैठकें फिर से शुरू होंगी।

- प्रमुख मांगें: लद्दाख के संगठन 33 प्रतिशत स्थानीय नौकरी आरक्षण, संवैधानिक सुरक्षा और विकास कार्यों में स्थानीय भागीदारी की मांग कर रहे हैं।
- एपेक्स बॉडी का रुख: लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस जैसे संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया है, लेकिन वे अपनी मांगों पर अडिग हैं।





