सिवनी जिले के केवलारी वन परिक्षेत्र से सागौन की अवैध कटाई और तस्करी का एक बड़ा मामला सामने आया है।
ग्रामीणों की सतर्कता से उजागर हुए इस प्रकरण ने वन विभाग की भूमिका और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है यह पूरा मामला?
“सिवनी जिले के केवलारी वन परिक्षेत्र में सागौन की अवैध कटाई और तस्करी का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है।
ग्रामीणों और पत्रकारों की सतर्कता से यह खुलासा हुआ कि जंगलों में तस्करों का नेटवर्क किस कदर सक्रिय है।
कटे हुए सागौन के पेड़, जलाने के निशान और ग्रामीणों की शिकायतें इस पूरे प्रकरण की पोल खोलती हैं।” इस मामले में कई बार वन विभाग को सूचना दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तस्करी रात में होती है, और जंगल तेजी से खत्म हो रहे हैं। अगर इसे रोका नहीं गया, तो हमारी प्राकृतिक धरोहर बर्बाद हो जाएगी।”
“सूत्रों का दावा है कि यह नेटवर्क सिर्फ केवलारी सिवनी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका कनेक्शन हैदराबाद और महाराष्ट्र जैसे राज्यों तक फैला हुआ है। स्थानीय मजदूरों से सागौन की लकड़ी मामूली दामों में कटवाई जाती है, जो बिचौलियों के जरिए ऊंचे दामों पर बेची जाती है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग के कुछ अधिकारी भी इस तस्करी में शामिल हो सकते हैं।”
“केवलारी के जंगलों में सागौन तस्करी का यह मामला न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी बड़ा सवाल है। क्या इस तस्करी के पीछे किसी बड़े नेटवर्क का हाथ है? और अगर सबूत मौजूद हैं, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
“इन सवालों के जवाब हम वन विभाग और प्रशासन से लगातार मांगते रहेंगे।
फिलहाल, ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि वन विभाग साक्ष्य मिटाने और मामले को दबाने की कोशिश कर रहा है, जिससे उनकी भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
अब देखना यह होगा कि वन विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है? और तस्करों के इस नेटवर्क को उजागर करने में कितना सफल होता है।”





