सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान से जगी इंसाफ की आस
by-vijay nandan
दिल्ली: मध्य प्रदेश के सागर जिले की खुरई विधानसभा में एक बच्चे के हाथ कटने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह और उनके भतीजे लखन सिंह समेत 8 को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है..इसमें सागर एसपी और कलेक्टर को भी व्यक्तिगत नोटिस जारी किया गया है. संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत यह रिट याचिका दायर की गई थी..जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे को विकलांगता की तरफ धकेलने वाले क्रशर संचालक और बच्चे को इंसाफ दिलाने में टालमटोल करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। क्या है पूरा मामला और अब तक क्यों नहीं मिला मासूम को इंसाफ ..पढ़िए पूरी रिपोर्ट..

यही वो 14 वर्षय बच्चा मानस शुक्ला है, जिसकी इंसाफ की गुहार देश की सबसे बड़ी अदालत सुप्रीम कोर्ट ने सुनी है.(gfx in) सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार, पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह और उनके भतीजे समेत 8 को नोटिस जारी किया है.. जिसमें व्यक्तिगत रूप से सागर कलेक्टर संदीप जीआर और एसपी विकास कुमार सहवाल भी शामिल हैं. इस संबंधित आठों को 4 हफ़्तों के भीतर नोटिस का जवाब देना है..
सुप्रीम कोर्ट इनको दिया नोटिस
- मध्य प्रदेश सरकार को नोटिस
- पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह और भतीजे समेत 8 को नोटिस
- सागर कलेक्टर संदीप जीआर को व्यक्तिगत रूप से नोटिस
- एसपी विकास कुमार सहवाल को व्यक्तिगत रूप से नोटिस
- नोटिस पर 4 हफ़्तों के भीतर मांगा जवाब

ये है पूरा मामला
अब आपको बताते हैं पूरा मामला क्या है..दरअसल सागर के बीना थाना क्षेत्र के बरदा गाँव के मानस शुक्ला को बिजली के हाईटेंशन तार की चपेट से एक हाथ गंवाना पड़ा…
यह घटना तब हुई जब बच्चा अपनी गेंद बचाने के लिए गांव के एक खेल के मैदान के पीछे अवैध रूप से रखे गए कुचले हुए पत्थर के ढेर पर चढ़ गया। कुचले हुए पत्थर का यह अवैध ढेर लाखन सिंह द्वारा लगाया गया था, जो एक अनधिकृत खनन
संचालन के मालिक और पूर्व कैबिनेट मंत्री और खुरई जिला मध्य प्रदेश के वर्तमान विधायक भूपेंद्र सिंह के भतीजे हैं।
परिजनों का आरोप है कि खुरई विधानसभा क्षेत्र में अवैध क्रशर का काम पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के भतीजा.. लखन सिंह द्वारा किया जा रहा है…जिसके खिलाफ वे कई बार FIR कराने थाने गए..लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई.. महीनों दर-दर भटकने के बाद मानस शुक्ला के पिता राकेश शुक्ला ने मानव अधिकार आयोग का भी दरवाजा खटखटाया..लेकिन मानव अधिकार आयोग के नोटिस के बाद भी इंसाफ का रास्ता नहीं खुला..
इतना ही नहीं 9 महीनों से चल रही इस इंसाफ की लड़ाई में साथ देने वाले समाजसेवी अंशुल सिंह परिहार को पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के भतीजे ने प्रताड़ित किया और झूठी एफआईआर दर्ज कराई. सवाल ये है कि जब एक मासूम बच्चा पूर्व मंत्री के परिजनों की लापरवाही का शिकार हो गया…जब उसके सपनों और जिंदगी को हमेशा के लिए अंधेरे में धकेल दिया गया. तब इतने महीनों तक सरकार और प्रशासन खामोश क्यों रहा? क्या एक पूर्व मंत्री का रसूख इंसाफ से भी बड़ा है? सुप्रीम कोर्ट की सख्ती ने अब इस केस को नई दिशा दी है… लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या दोषियों को सजा मिलेगी और क्या पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह पर एफआईआर होगी. क्या प्रशासनिक मामले में लापरवाही बरतने वाले कलेक्टर और एसपी पर भी कार्रवाई होगी ?





