रिपोर्टर: मुकुल शुक्ला, EDIT BY: MOHIT JAIN
सागर जिले की देवरी विधान सभा अंतर्गत केसली जनपद पंचायत की ग्राम पंचायत तुलसीपार में सीसी सड़क निर्माण के दौरान नाबालिग बच्चों से काम कराए जाने का मामला सामने आया है। यह घटना 25 सितंबर, गुरुवार की है, जब मीडिया टीम मौके पर पहुंची और करीब 5 बच्चों को काम करते हुए देखा।
इन बच्चों की उम्र लगभग 14 से 17 साल बताई गई। बच्चों ने मीडिया को बताया कि उन्हें यह काम ग्राम पंचायत के अधिकारियों द्वारा करवाया जा रहा है।
पंचायत अधिकारियों की मिलीभगत में भ्रष्टाचार
सूत्रों के अनुसार, सड़क निर्माण कार्य में ग्राम पंचायत के सचिव निरंजन खरे, सह सचिव गोपाल गौंड़ और सरपंच राधारानी गौंड़ की भूमिका संलिप्त है।

- सचिव निरंजन खरे के अनुसार, सड़क निर्माण की लागत 6 लाख रुपये और लंबाई 210 मीटर है।
- कार्य में रेत की जगह डस्ट का भारी मात्रा में उपयोग किया जा रहा है।
- सड़क किनारे बनी नालियों की मोटाई 4 से 5 इंच, जबकि बीच में 2 से 3 इंच की मोटाई दी जा रही है।
- सीसी सड़क निर्माण में वाइब्रेटर या पॉलीथीन का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, जिससे गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि जनपद पंचायत के अधिकारियों को पहले हिस्सा मिल जाता है, जिसके चलते पंचायत स्तर के अधिकारी मनमर्जी से काम करवा रहे हैं।
बाल मजदूरी और कानून
बाल मजदूरी को मध्य प्रदेश और केंद्र सरकार दोनों द्वारा गंभीर अपराध माना गया है। इसके खिलाफ कठोर कानून मौजूद हैं। लेकिन तुलसीपार मामले में जिम्मेदार सरकारी कर्मचारी इस कानून की अवहेलना कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सड़क निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच होती है, तो सरपंच, सचिव और रोजगार सचिव का भ्रष्टाचार उजागर हो जाएगा।
आगे की कार्रवाई और संभावित जांच
स्थानीय मीडिया और ग्रामीण लगातार इस मामले पर नजर बनाए हुए हैं। भविष्य में केसली जनपद पंचायत के अन्य पंचायतों में मनरेगा और सड़क निर्माण कार्यों में हो रहे भ्रष्टाचार की खबरें भी सामने आने की संभावना है।
इस मामले ने स्पष्ट कर दिया है कि बाल मजदूरी और घटिया निर्माण कार्य के खिलाफ गंभीर कदम उठाना अब सरकार और जनप्रतिनिधियों के लिए जरूरी है।





