Report: Avinash Shrivastava
Rohtas रोहतास जिले के मुख्य चिकित्सा केंद्र, सदर अस्पताल सासाराम में संवेदनहीनता की पराकाष्ठा देखने को मिली। अस्पताल प्रबंधन के दावों के विपरीत, धरातल पर मरीजों को बुनियादी सुविधाएं भी नसीब नहीं हो रही हैं। सोमवार को ओपीडी में इलाज कराने पहुंचे एक शख्स को जब व्हीलचेयर नहीं मिली, तो वह अपनी भारी-भरकम पत्नी को कंधे पर उठाकर एक विभाग से दूसरे विभाग के चक्कर काटता रहा।

दो दिनों तक कुव्यवस्था की मार झेलता रहा पीड़ित परिवार
Rohtas धनकाढा़ गांव के निवासी साहेब राम ने बताया कि उनकी पत्नी का पैर फ्रैक्चर हो गया था। वे रविवार को भी इलाज की उम्मीद में अस्पताल आए थे, लेकिन घंटों इंतजार के बाद पता चला कि डॉक्टर मौजूद नहीं हैं। अगले दिन यानी सोमवार को जब वे दोबारा पहुंचे, तो उन्हें व्हीलचेयर के लिए घंटों मिन्नतें करनी पड़ीं। अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही के कारण पीड़ित को शारीरिक और मानसिक दोनों तरह की प्रताड़ना झेलनी पड़ी।
व्हीलचेयर के लिए भटकता रहा पति, कर्मियों ने झाड़ा पल्ला
Rohtas पीड़ित पति के अनुसार, उसकी पत्नी चलने-फिरने में पूरी तरह असमर्थ थी। उन्होंने मौजूद स्वास्थ्य कर्मियों से बार-बार व्हीलचेयर या स्ट्रेचर उपलब्ध कराने की गुहार लगाई, लेकिन कर्मियों ने ओपीडी में व्हीलचेयर उपलब्ध न होने की बात कहकर अपना पल्ला झाड़ लिया। मजबूरी में साहेब राम अपनी पत्नी को कभी एक्स-रे रूम तो कभी डॉक्टर के चैंबर तक अपनी पीठ पर लादकर ले जाते दिखे।
सरकारी दावों और हकीकत के बीच की गहरी खाई
Rohtas यह पहली बार नहीं है जब सासाराम सदर अस्पताल की बदहाली की तस्वीरें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल में चिकित्सकों की देरी से उपस्थिति, दवाओं का अभाव और बिचौलियों का हस्तक्षेप आम बात हो गई है। करोड़ों के बजट और सरकारी दावों के बावजूद, एक स्ट्रेचर तक उपलब्ध न होना अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।





