रिपोर्ट : शैलेंद्र पारे
Ratlam महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शनिवार को रतलाम शहर पूरी तरह केसरिया रंग में रंगा नजर आया। प्रमुख चौराहों से लेकर गलियों तक, हर तरफ केसरिया ध्वज और उल्लास का माहौल रहा। इस अवसर पर जवाहर व्यायाम शाला परिवार द्वारा आयोजित भव्य ‘सम्मान साफा (वाहन) रैली’ ने शहर की सांस्कृतिक एकता और भक्ति भाव को एक नई ऊँचाई प्रदान की।

राजस्थानी संस्कृति और साफे का गौरव
Ratlam इस रैली की सबसे बड़ी विशेषता प्रतिभागियों का पारंपरिक पहनावा रहा। आयोजन को भव्य बनाने के लिए विशेष रूप से राजस्थान के जोधपुर और पाली से साफे मंगवाए गए थे। रैली की शुरुआत से पहले जवाहर व्यायामशाला परिसर में 20 से अधिक विशेषज्ञों ने हजारों प्रतिभागियों को पारंपरिक तरीके से साफा बांधकर सम्मानित किया। एक जैसे केसरिया साफे पहने हजारों युवाओं, जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों का समूह जब सड़क पर उतरा, तो ऐसा लगा मानो पूरा शहर भगवा सागर में तब्दील हो गया हो।
भजनों की गूंज और नारी शक्ति का प्रदर्शन
Ratlam रैली का नेतृत्व बैंड-बाजों और डीजे की धुन पर बज रहे भगवान भोलेनाथ के भजनों ने किया। संगीत की लहरियों पर थिरकते भक्तों के पीछे मातृशक्ति का जत्था आकर्षण का केंद्र रहा। केसरिया साफा बांधे और हाथों में ध्वज लिए बड़ी संख्या में महिलाएं बाइक पर सवार होकर रैली में शामिल हुईं। प्रतिभागियों के एक हाथ में तिरंगा और दूसरे में केसरिया ध्वज राष्ट्रभक्ति और धर्म के अद्भुत संगम का संदेश दे रहे थे।

सामाजिक समरसता: ढोल की थाप पर एकता का संदेश
Ratlam इस धार्मिक आयोजन ने सांप्रदायिक सौहार्द की एक प्रेरक मिसाल भी पेश की। रैली के दौरान एक मुस्लिम युवक केसरिया ध्वज थामे हुए पूरी ऊर्जा के साथ ढोल बजाता नजर आया। इस दृश्य ने वहां मौजूद हर शख्स का ध्यान खींचा और यह संदेश दिया कि भक्ति और उत्सव की खुशियां सभी दीवारों को तोड़कर समाज को एक सूत्र में पिरोती हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों और समुदायों की सक्रिय भागीदारी ने इस आयोजन को केवल एक धार्मिक रैली न रखकर एक ‘लोक उत्सव’ बना दिया।





