महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले में एक अद्भुत घटना हुई है। संगमेश्वर तालुका के दाभोले गांव के पास जंगल में काम कर रहे मजदूरों को दो तेंदुए के बच्चे दिखाई दिए, जिनमें से एक बिल्कुल सफेद रंग का था। यह दृश्य इतना दुर्लभ है कि वन विभाग के अधिकारी भी हैरान रह गए।
क्या हुआ था?
- मजदूर काजू के बागान के लिए पेड़ काट रहे थे, तभी उन्हें दो नन्हे तेंदुए के बच्चे दिखे।
- एक शावक का रंग सामान्य था, लेकिन दूसरा पूरी तरह सफेद था।
- मादा तेंदुआ वहीं आसपास थी, और जब उसे खतरा महसूस हुआ तो उसने मजदूरों पर हमला कर दिया।
- वन विभाग को सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक मां तेंदुआ अपने बच्चों को लेकर जंगल में कहीं चली गई थी।
क्या यह ‘एल्बिनो’ तेंदुआ है?
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह शावक एल्बिनो (पूरी तरह मेलेनिन की कमी) है या ल्यूसिस्टिक (आंशिक रंगहीनता)। एल्बिनो जानवरों की आँखें गुलाबी होती हैं, जबकि ल्यूसिस्टिक में आँखें सामान्य रहती हैं। चूंकि शावक की आँखें अभी खुली नहीं हैं, इसलिए पुष्टि के लिए वन विभाग ने कैमरा ट्रैप लगाए हैं।

क्यों है यह खबर महत्वपूर्ण?
- यह पहली बार है जब महाराष्ट्र में सफेद तेंदुए का शावक देखा गया है।
- तेंदुए आमतौर पर गहरे रंग के धब्बेदार होते हैं, लेकिन जेनेटिक म्यूटेशन की वजह से कभी-कभी सफेद रंग के भी पैदा होते हैं।
- यह घटना जैव विविधता की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह दर्शाता है कि भारत के जंगल अभी भी कई रहस्यों से भरे हुए हैं।
वन विभाग की कार्रवाई
वन अधिकारियों ने शावकों की सुरक्षा के लिए क्षेत्र में कैमरा ट्रैप लगाए हैं और उनकी गतिविधियों पर नज़र रखी जा रही है। साथ ही, लोगों से अपील की गई है कि वे जंगल में अकेले न जाएं, क्योंकि मादा तेंदुआ आसपास ही हो सकती है।
क्या यह शुभ संकेत है?
कुछ लोगों का मानना है कि सफेद तेंदुआ दुर्लभ और पवित्र माना जाता है। हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टि से यह सिर्फ एक जेनेटिक विविधता का उदाहरण है।
निष्कर्ष:
यह घटना हमें याद दिलाती है कि प्रकृति अभी भी हमें हैरान करने की क्षमता रखती है। लेकिन साथ ही, यह जंगलों के संरक्षण की अहमियत को भी रेखांकित करती है। अगर हमने इन नायाब प्राणियों के आवास को नष्ट कर दिया, तो भविष्य में ऐसे दुर्लभ नज़ारे देखने को नहीं मिलेंगे।
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