रिपोर्ट-सुमित कुमार मेहरा
दो बार रावण दहन की अनूठी परंपरा
Raisen रायसेन नगर प्रदेश का पहला ऐसा नगर है, जहाँ वर्ष में दो बार रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है। दशहरे के बाद आयोजित होने वाले वार्षिक रामलीला मेले में मैदानी मंचन के दौरान रावण वध के उपरांत दशहरे की तर्ज पर विशाल रावण पुतले का दहन किया जाता है। इस परंपरा में पूरा नगर उत्साह और श्रद्धा के साथ सहभागी बनता है।

115 वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत
Raisen करीब 115 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रहे इस प्रसिद्ध रामलीला मेले का एक माह तक भव्य आयोजन होता है। मैदानी मंचन के साथ प्रस्तुत रामलीला देश के चुनिंदा स्थानों पर ही देखने को मिलती है। आज रावण दहन के साथ इस ऐतिहासिक मेले का विधिवत समापन किया गया।

मुख्य अतिथि ने श्रीराम के आदर्शों पर दिया संदेश
Raisen समापन अवसर पर पूर्व मंत्री एवं स्थानीय विधायक डॉ. प्रभुराम चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने अयोध्या में नवनिर्मित श्रीराम मंदिर के दर्शन को आए पश्चिम बंगाल के श्रद्धालुओं के अनुभव साझा किए। रावण वध के अवसर पर उन्होंने भगवान श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान आतिशबाजी के साथ रावण पुतले का दहन किया गया। इस रामलीला की विशेषता यह है कि इसमें मंचन करने वाले सभी कलाकार स्थानीय होते हैं, जो इसे अपनी सांस्कृतिक पहचान और गौरव मानते हैं।
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