Rabies Free City: केंद्र सरकार ने देश के 100 शहरों को वर्ष 2030 तक रेबीज मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। इस सूची में मध्य प्रदेश के छह शहर शामिल किए गए हैं, जिनमें ग्वालियर भी शामिल है। इसी कड़ी में ग्वालियर नगर निगम ने रेबीज मुक्त शहर बनाने के लिए केंद्र सरकार को 7 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है।
Rabies Free City: रोजाना 150 लोग कुत्ते के काटने के शिकार
ग्वालियर में प्रतिदिन औसतन 150 लोग कुत्ते के काटने की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं। यह आंकड़ा प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
शहर में 50 हजार से अधिक आवारा कुत्तों का अनुमान
लगभग 18 लाख की आबादी वाले ग्वालियर शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हालांकि अब तक शहर में कुत्तों की आधिकारिक गणना नहीं हुई है, लेकिन नगर निगम के अनुमान के अनुसार शहर में 50 हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं।
फिलहाल आवारा कुत्तों के जन्म नियंत्रण के लिए शहर में केवल एक एनिमल बर्थ कंट्रोल (एबीसी) सेंटर ही संचालित है।

बुजुर्ग और बच्चे बन रहे आसान शिकार
आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ रहा है। कुत्तों के हमले का शिकार अधिकतर यही वर्ग बन रहा है, जिससे लोगों में डर का माहौल है।
Rabies Free City: प्रदेश के अन्य शहर भी शामिल
रेबीज मुक्त शहरों की सूची में ग्वालियर के साथ भोपाल, इंदौर, उज्जैन और जबलपुर भी शामिल हैं। इन सभी नगर निगमों ने अपने-अपने स्तर पर योजना तैयार कर केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है।
आवारा और पालतू कुत्तों के लिए टीकाकरण अभियान शुरू
नगर निगम ने आवारा कुत्तों के साथ-साथ पालतू कुत्तों के लिए भी टीकाकरण अभियान शुरू किया है। इसके तहत ग्वालियर चिड़ियाघर में पंजीयन की सुविधा दी गई है।

पालतू कुत्तों के पंजीयन में कम रुचि
हालांकि अभियान के बावजूद शहरवासियों की अपेक्षित भागीदारी नहीं मिल पा रही है। अब तक केवल 400 पालतू कुत्तों का ही पंजीयन हो सका है।
Rabies Free City: असली चुनौती आवारा कुत्तों का टीकाकरण
चिड़ियाघर क्यूरेटर गौरव परिहार ने बताया कि पालतू कुत्तों के मालिक आमतौर पर जागरूक होते हैं और वे अपने कुत्तों को एंटी-रेबीज सहित अन्य टीके स्वयं लगवाते हैं।
उन्होंने कहा कि असली चुनौती आवारा कुत्तों का टीकाकरण और नसबंदी है, जिसके लिए नगर निगम एबीसी सेंटर के माध्यम से लगातार प्रयास कर रहा है।





