BY: MOHIT JAIN
आज यानी 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 75वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर उनके जीवन और संघर्षों से जुड़ी नेशनल अवॉर्ड विनिंग फिल्म ‘चलो जीते हैं’ को देशभर में दोबारा रिलीज किया गया है।
यह फिल्म 2018 में पहली बार रिलीज हुई थी और तब से यह सबसे ज्यादा देखी जाने वाली शॉर्ट फिल्मों में शामिल हो चुकी है। फिल्म का आधार प्रधानमंत्री मोदी का बचपन और स्वामी विवेकानंद का वह विचार है – “वही जीते हैं, जो दूसरों के लिए जीते हैं।”
500 थिएटर और स्कूलों में दिखाई जाएगी फिल्म

‘चलो जीते हैं’ को आज से देशभर के 500 सिनेमाघरों में री-रिलीज किया गया है। इसके साथ ही यह फिल्म लाखों स्कूलों में भी दिखाई जाएगी।
फिल्म की स्क्रीनिंग का कार्यक्रम 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चलेगा।
इसके अलावा बीजेपी बिहार ने घोषणा की है कि राज्य के सभी 243 विधानसभा क्षेत्रों में इस फिल्म की विशेष स्क्रीनिंग आयोजित की जाएगी। स्क्रीनिंग के साथ-साथ कई अन्य सांस्कृतिक और प्रेरणादायक कार्यक्रम भी रखे जाएंगे।
युवाओं और समाज के लिए प्रेरणा
निर्देशक मंगेश हदावले के निर्देशन में बनी यह फिल्म एक संवेदनशील बालक की कहानी कहती है, जो छोटी-छोटी परिस्थितियों में भी बड़ा जीवन संदेश देता है।
यह फिल्म हर दर्शक को यह सिखाती है कि –
- कठिनाइयों के बावजूद सेवा और संकल्प की राह चुनने वाला ही समाज का सच्चा सेवक होता है।
- हर काम और हर व्यक्ति का सम्मान करना जरूरी है।
- जीवन का सच्चा उद्देश्य केवल अपने लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए जीना है।
क्यों है खास यह फिल्म
प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर इसका दोबारा रिलीज होना केवल एक यादगार क्षण नहीं, बल्कि युवाओं के लिए एक प्रेरणादायी संदेश भी है। यह फिल्म बच्चों, छात्रों और हर नागरिक को यह सोचने पर मजबूर करती है कि समाज को बेहतर बनाने में उनका योगदान कितना जरूरी है।





