रिपोर्ट: निज़ाम अली
Pilibhit । जिले के बिलसंडा ब्लॉक अंतर्गत ग्राम ओढ़ाझार में रास्ते की जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि हल्का लेखपाल ने बिना किसी कानूनी प्रक्रिया या पूर्व सूचना के बुलडोजर चलवाकर कई परिवारों के मकान जमींदोज कर दिए। इस कार्रवाई के दौरान मौके पर न तो तहसील के उच्च अधिकारी मौजूद थे और न ही पर्याप्त पुलिस बल।
नियमों की अनदेखी: बिना महिला पुलिस के हुई कार्रवाई
Pilibhit पीड़ित परिवारों का सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब बुलडोजर चला, तब घरों में केवल महिलाएं मौजूद थीं। मौके पर एक भी महिला कांस्टेबल तैनात नहीं थी, जो प्रशासनिक नियमों का सीधा उल्लंघन है। राधा देवी, आशा और ओमवती जैसी प्रभावित महिलाओं ने बताया कि उन्होंने कार्रवाई का विरोध किया और अपनी बात रखनी चाही, लेकिन उनकी एक न सुनी गई। आरोप है कि विरोध करने पर उन्हें धमकियां दी गईं और उनकी अनुपस्थिति में ही 30-30 साल पुराने मकानों को तोड़ दिया गया।

ग्राम प्रधान और ग्रामीणों ने उठाए सवाल
Pilibhit इस पूरे घटनाक्रम पर ग्राम प्रधान नेमचंद गंगवार ने भी हैरानी जताई है। उनका कहना है कि इस कार्रवाई के बारे में ग्राम पंचायत को किसी भी प्रकार की आधिकारिक सूचना नहीं दी गई थी। ग्रामीणों का दावा है कि उन्हें कभी कोई लिखित नोटिस नहीं मिला, जिससे उन्हें अपना पक्ष रखने या अतिक्रमण हटाने का समय मिल सके। अचानक हुई इस तोड़फोड़ से कई परिवार बेघर हो गए हैं और क्षेत्र में प्रशासन के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है।
एसडीएम से न्याय और मुआवजे की गुहार
Pilibhit कार्रवाई से आक्रोशित ग्रामीणों ने बीसलपुर तहसील के एसडीएम से इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। पीड़ितों ने नुकसान का मुआवजा दिलाने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए ज्ञापन सौंपा है। हालांकि, इस पूरे विवाद पर फिलहाल पीलीभीत जिला प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या बयान जारी नहीं किया गया है।
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