रिपोर्ट- मनोज जंगम, एडिट- विजय नंदन
जगदलपुर: छत्तीसगढ़ के जगदलपुर जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसने समाज और प्रशासन दोनों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। करपावंड क्षेत्र में रहने वाली एक महिला ने कथित रूप से घरेलू प्रताड़ना से तंग आकर छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। महिला ने अपनी मौत से पहले एक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें उसने अपने ससुराल पक्ष पर मारपीट, दहेज उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। पुलिस ने मौके से सुसाइड नोट बरामद कर लिया है और मृतका के पति सतेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। यह पूरा मामला करपावंड थाना क्षेत्र का है।

सुसाइड नोट में लिखा: “पापा, अब बहुत दूर जा रही हूं”
मृतका ने अपने पिता को संबोधित करते हुए लिखा, “आदरणीय पापा, मैं बहुत परेशान हूं। मेरे ससुराल वाले मुझे घसीटकर मारते हैं, दहेज के लिए प्रताड़ित करते हैं और आप लोगों को भी गालियां देते हैं। आज मेरा चीरहरण किया गया है। मैं अब तंग आ गई हूं, बहुत दूर जा रही हूं। आप 15 अक्टूबर की सुबह 7:35 का CCTV फुटेज देखिएगा, उसमें सबूत मिल जाएगा।
महिला ने आगे लिखा कि उसकी तबीयत लंबे समय से खराब रहती थी, सिरदर्द, कमर दर्द की शिकायत थी लेकिन उसका पति उसे कभी डॉक्टर के पास नहीं ले जाता था, बल्कि विरोध करने पर मारपीट करता था।

पुलिस ने पति को किया गिरफ्तार
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला के पति सतेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। एएसपी महेश्वर नाग ने बताया कि आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108, 115(2), 296, 351(2) समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, मृतका के बयान और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है।
समाज और प्रशासन पर उठे सवाल
इस घटना ने एक बार फिर महिला सुरक्षा और घरेलू हिंसा को लेकर समाज की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। हर बार की तरह एक महिला की जान चली गई, लेकिन सवाल वही है कि आखिर महिलाएं आज भी अत्याचार झेलने को क्यों मजबूर हैं?
क्या प्रशासन और समाज की संयुक्त जिम्मेदारी नहीं कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए समय रहते हस्तक्षेप किया जाए? दहेज और मानसिक उत्पीड़न जैसे अपराधों के खिलाफ कड़े कानून होने के बावजूद कार्रवाई इतनी देर से क्यों होती है? स्थानीय महिलाओं ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि समाज में आज भी महिलाओं की आवाज़ को दबा दिया जाता है। परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं और पुलिस से आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की है। यह घटना केवल एक महिला की आत्महत्या नहीं, बल्कि समाज और तंत्र की संवेदनहीनता की दर्दनाक मिसाल है। सवाल अब यह है कि क्या इस बार भी जांच के बाद मामला फाइलों में बंद हो जाएगा या किसी की बेटी को इंसाफ मिल पाएगा?





