BY: Yoganand Shrivastva
पेशावर: अफगानिस्तान की सीमा से सटे पाकिस्तानी इलाके में आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच भीषण मुठभेड़ हुई, जिसमें पाकिस्तान ने आठ आतंकवादियों को मार गिराया। यह मुठभेड़ मंगलवार को बाजौर जिले की लोई मामुंड तहसील में हुई, जो खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में स्थित है।
मारे गए आतंकियों की पहचान प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े सदस्यों के रूप में हुई है। इस संगठन को कई बार ‘फितना अल-खवारिज’ के नाम से भी पुकारा जाता है। स्थानीय लोगों के मुताबिक मुठभेड़ कई घंटों तक चली और इस दौरान इलाका गोलियों की आवाज़ों से थर्रा उठा।
कैसे हुआ हमला?
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली थी कि कुछ आतंकी अफगानिस्तान के कुनार प्रांत से होकर पाक सीमा में घुसपैठ करने की योजना बना रहे हैं। इस अलर्ट के मिलते ही सुरक्षा बल हरकत में आ गए और संदिग्ध आतंकियों को पकड़ने के लिए रणनीतिक घेराबंदी की गई।
जैसे ही आतंकी सीमा पार करते हुए नजर आए, सुरक्षा बलों ने गोलाबारी शुरू कर दी। जवाबी फायरिंग में आठ आतंकी मौके पर ही मारे गए। हालांकि, मुठभेड़ के दौरान एक स्थानीय बच्चा घायल हो गया, जिसे पहले लार्खोलोजो अस्पताल और फिर गंभीर हालत में खार के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया।
आधिकारिक बयान अभी लंबित
हालांकि पाकिस्तान की सेना या ISPR (इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस) की ओर से इस पूरे ऑपरेशन पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन स्थानीय लोगों और मीडिया रिपोर्ट्स ने इस मुठभेड़ की पुष्टि की है।
बम धमाके के एक हफ्ते बाद हुई कार्रवाई
गौरतलब है कि यह मुठभेड़ 2 जुलाई को खार तहसील में हुए एक जानलेवा बम धमाके के ठीक एक हफ्ते बाद हुई है। उस हमले में एक सरकारी वाहन को निशाना बनाया गया था, जिसमें एक सहायक आयुक्त, एक तहसीलदार और तीन अन्य लोग मारे गए थे। इसके अलावा 17 लोग घायल हुए थे, जिनमें चार पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
आतंकी गतिविधियों में तेजी
पाकिस्तान में TTP द्वारा संघर्ष विराम तोड़ने के बाद से आतंकी घटनाओं में तेजी देखी जा रही है। नवंबर 2022 में TTP ने पाकिस्तान सरकार के साथ समझौता समाप्त कर दिया था, जिसके बाद से खासकर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान जैसे सीमावर्ती इलाकों में आतंकवादियों की गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।
सरकार और सुरक्षाबल अब इन इलाकों में चौकसी बढ़ा रहे हैं और घुसपैठ की कोशिशों को विफल करने के लिए सीमाओं पर निगरानी कड़ी कर दी गई है।
इस ताज़ा कार्रवाई को पाकिस्तान की आतंकवाद के खिलाफ रणनीति का एक निर्णायक कदम माना जा रहा है। जहां एक ओर आतंकी संगठन सीमाओं के पार से हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना अब अधिक सतर्कता और आक्रामकता से जवाब देने में जुट गई है।





