BY: Yoganand Shrivastvav
‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद बौखलाए पाकिस्तान ने गुरुवार रात भारत के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, लेकिन भारतीय वायुसेना ने उसकी यह कोशिश पूरी तरह विफल कर दी। इस जवाबी कार्रवाई में अहम भूमिका निभाई भारत की Integrated Air Command and Control System यानी IACCS ने, जो वायुसेना की सबसे अत्याधुनिक और रणनीतिक रक्षा प्रणाली मानी जाती है।
क्या है IACCS?
IACCS एक उन्नत नेटवर्क है जो ज़मीन पर लगे राडार, हवाई विमानों और अन्य निगरानी प्रणालियों को एक साथ जोड़ता है। इसकी मदद से पूरे हवाई क्षेत्र की हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है और किसी भी खतरे का तुरंत पता लगाया जा सकता है।
IACCS की प्रमुख खूबियाँ:
- रीयल-टाइम मॉनिटरिंग: यह प्रणाली हवा और ज़मीन से मिले संकेतों को फौरन कैप्चर करती है, जिससे निर्णय लेने में तेजी आती है।
- संचार और समन्वय: IACCS, विभिन्न सैन्य प्लेटफॉर्म्स और हथियार प्रणालियों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करता है।
- रक्षा कवच: यह प्रणाली दुश्मनों के हवाई हमलों को नाकाम करने में निर्णायक भूमिका निभाती है और हमारी एयर डिफेंस को अभेद्य बनाती है।
- स्वदेशी तकनीक: IACCS को पूरी तरह भारत में ही विकसित किया गया है, जो भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
ऑपरेशन में किस-किस तकनीक का हुआ इस्तेमाल?
वायुसेना ने पाकिस्तानी हमलों का जवाब देने के लिए लॉन्ग रेंज लॉइटरिंग म्यूनिशन, इगला मैनपैड्स, ड्रोन रोधी सिस्टम, SNS जैमर, ECGNSS जैमर, जैमिंग राइफल्स, और CUAS (Counter Unmanned Aerial Systems) जैसे आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया। इन तकनीकों की मदद से पाकिस्तान के ड्रोन और मिसाइल हमलों को पूरी तरह नाकाम कर दिया गया।
IACCS की वजह से भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान के किसी भी हवाई हमले का समय रहते पता चल गया और उसे प्रभावशाली ढंग से निष्क्रिय कर दिया गया। यह प्रणाली न केवल हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करती है, बल्कि यह दर्शाती है कि भारत अब किसी भी हवाई चुनौती से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।





