BY
Yoganand Shrivastava
New Delhi पहले से ही दाने-दाने को मोहताज पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मोर्चे से एक बेहद बुरी खबर सामने आई है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अपनी 2 अरब डॉलर (लगभग 16,500 करोड़ रुपये) की सुरक्षित जमा राशि (Safe Deposit) को तुरंत वापस मांग लिया है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते युद्ध के तनाव के बीच यूएई का यह फैसला पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ने वाला साबित हो सकता है।

New Delhi‘सुरक्षित जमा’ बना सिरदर्द: 17 अप्रैल तक चुकानी होगी भारी रकम
यूएई ने यह राशि पाकिस्तान के स्टेट बैंक (SBP) में विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा देने के लिए रखी थी। आमतौर पर यूएई हर साल इस कर्ज की अवधि (Roll-over) बढ़ा देता था, जिससे पाकिस्तान को तुरंत भुगतान नहीं करना पड़ता था। लेकिन इस बार यूएई ने समय सीमा बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है। 17 अप्रैल तक पाकिस्तान को यह रकम हर हाल में लौटानी होगी, जिस पर वह पहले से ही 6 प्रतिशत की भारी दर से ब्याज चुका रहा था।

New Delhi विदेशी मुद्रा भंडार पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ का खतरा
वर्तमान में पाकिस्तान के पास कुल विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 21 अरब डॉलर के करीब है। तकनीकी रूप से पाकिस्तान यह 2 अरब डॉलर चुकाने में सक्षम तो दिख रहा है, लेकिन एक साथ इतनी बड़ी राशि बाहर जाने से देश का खजाना खाली होने के कगार पर पहुँच जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पाकिस्तान ने यह भुगतान किया, तो उसे अपनी अन्य जरूरतों और पुराने कर्जों की किश्तें चुकाने के लिए एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के सामने झोली फैलानी होगी।

New Delhi क्या सऊदी अरब और चीन भी खींचेंगे हाथ?
पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा डर यह है कि यूएई के इस सख्त रुख के बाद अन्य कर्जदाता देश भी अपना पैसा वापस मांग सकते हैं। इस वित्त वर्ष में पाकिस्तान को कुल 12 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज को रोल-ओवर करवाने की सख्त जरूरत है, जिसमें सऊदी अरब के 5 अरब और चीन के 4 अरब डॉलर भी शामिल हैं। यदि इन देशों ने भी यूएई की राह पकड़ी, तो शहबाज शरीफ सरकार के पास देश को ‘दिवालिया’ (Bankrupt) घोषित करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा।
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